विकास नंद/सर्वव्यापी
छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग में मंगलवार को आयोजित सुनवाई के दौरान महिला उत्पीड़न और पारिवारिक विवादों से जुड़े कई मामलों का समाधान आपसी समझाइश और काउंसलिंग के माध्यम से किया गया। आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक तथा सदस्य सरला कोसरिया की उपस्थिति में हुई सुनवाई में कई परिवारों को टूटने से बचाया गया तथा लंबे समय से चले आ रहे विवादों का निपटारा कराया गया।सुनवाई के दौरान एक मामले में विधवा बहू और उसकी सास के बीच संपत्ति को लेकर विवाद था। बहू अपने नाबालिग बच्चों के साथ नए मकान में रह रही थी, जबकि सास पुराने मकान में निवास कर रही थी। दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद आयोग ने समझौता कराया कि दोनों अपने-अपने मकानों में बिना किसी हस्तक्षेप के रहेंगे। सहमति बनने पर प्रकरण का निराकरण कर दिया गया।एक अन्य मामले में पति-पत्नी के बीच विवाद के चलते पत्नी पति के साथ रहने को तैयार नहीं थी। सुनवाई के दौरान पति ने पत्नी का विवाह संबंधी सामान और स्त्रीधन लौटाने की सहमति दी। आयोग ने अगली सुनवाई में पूरा सामान प्रस्तुत कर पत्नी को सुपुर्द करने के निर्देश दिए।एक अन्य प्रकरण में महिला अपने सास-ससुर के साथ रहने में असुरक्षित महसूस कर रही थी, लेकिन पति के साथ उसी घर के अलग हिस्से में रहने को तैयार थी। आयोग की समझाइश पर पति ने संबंध सुधारने का आश्वासन दिया। मामले की नियमित निगरानी करने की अनुशंसा के साथ प्रकरण का निपटारा किया गया।सुनवाई के दौरान एक गंभीर मामले में सामने आया कि सुकमा में पदस्थ एक पुलिस आरक्षक ने विवाहित होने के बावजूद दूसरी महिला से संबंध स्थापित किए, जिससे एक बच्ची का जन्म हुआ। आयोग ने आरक्षक को शासकीय सेवा के नियमों और संभावित कार्रवाई से अवगत कराया। इसके बाद उसने महिला और बच्ची के भरण-पोषण के लिए एकमुश्त 5 लाख रुपये देने की सहमति जताई। सुनवाई के दौरान 10 हजार रुपये तत्काल दिए गए, जबकि शेष राशि अगली सुनवाई में देने का आश्वासन दिया गया।एक अन्य मामले में डेढ़ वर्ष से मायके में रह रही महिला को उसके बच्चों से मिलने नहीं दिया जा रहा था। आयोग के समक्ष हुई काउंसलिंग में दोनों बच्चों ने अपनी मां के साथ रहने की इच्छा व्यक्त की। आयोग की पहल से परिवार को फिर से जोड़ने की दिशा में सहमति बनी। मामले की छह माह तक निगरानी करने के लिए आयोग ने एक कर्मचारी को नियुक्त किया है।सुनवाई में एक विशेष मामला मूक-बधिर दंपति से जुड़ा था। पति ने आरोप लगाया कि पत्नी अनजान लोगों से चैटिंग करती है और निजी वीडियो साझा करती है। दोनों पक्षों की काउंसलिंग के बाद पत्नी ने अपनी गलती स्वीकार की और मोबाइल का दुरुपयोग नहीं करने का आश्वासन दिया। समझाइश के बाद यह मामला भी सुलझा लिया गया।महिला आयोग की सुनवाई में कुल मिलाकर तीन परिवारों को पुनः जोड़ने में सफलता मिली, जबकि कई अन्य मामलों में आपसी सहमति और समझौते के जरिए विवादों का समाधान कराया गया। आयोग ने पारिवारिक संबंधों को मजबूत बनाने और महिलाओं को न्याय दिलाने की दिशा में निरंतर प्रयास जारी रखने की बात कही।