योग दिवस की तस्वीर पर सियासी बवाल: मंत्री के परिधान पर बने कमल को लेकर उठे सवाल, भाजपा पर दोहरे मापदंड के आरोप।

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तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम की एक तस्वीर अब प्रदेश की राजनीति में नई बहस का कारण बनती नजर आ रही है। सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही एक तस्वीर में प्रदेश की महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े योगासन करती दिखाई दे रही हैं। तस्वीर में उनके परिधान के निचले हिस्से पर कमल का चित्र बना हुआ है, जो योग मुद्रा के दौरान उनके पैर के समीप दिखाई दे रहा है। इसी तस्वीर को लेकर विपक्षी समर्थकों और सोशल मीडिया यूजर्स द्वारा भाजपा सरकार पर तीखे सवाल उठाए जा रहे हैं।वायरल पोस्टों में दावा किया जा रहा है कि जिस “कमल” चुनाव चिन्ह के सहारे भाजपा ने सत्ता प्राप्त की, आज उसी कमल के प्रतीक को पैरों तले दिखाकर पार्टी अपने ही प्रतीकों और संस्कारों का अनादर कर रही है। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने इसे भाजपा के कथित “दोहरे चरित्र” और “पाखंड” का उदाहरण बताते हुए आलोचना की है। उनका कहना है कि यदि ऐसा दृश्य किसी विपक्षी नेता या अन्य दल के प्रतिनिधि के साथ सामने आता, तो भाजपा के नेता और कार्यकर्ता इसे संस्कृति, परंपरा और प्रतीकों के अपमान का बड़ा मुद्दा बना देते।हालांकि, तस्वीर का दूसरा पक्ष भी सामने आ रहा है। भाजपा समर्थकों का तर्क है कि मंत्री के वस्त्र पर बना कमल केवल एक सजावटी डिज़ाइन का हिस्सा है और योग मुद्रा के दौरान उसका पैर के निकट दिखाई देना किसी जानबूझकर किए गए कृत्य का प्रमाण नहीं माना जा सकता। उनका कहना है कि इसे राजनीतिक रंग देकर अनावश्यक विवाद खड़ा किया जा रहा है।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी माहौल भले अभी दूर हो, लेकिन सोशल मीडिया के दौर में प्रतीकों और छवियों की राजनीति पहले से कहीं अधिक संवेदनशील हो चुकी है। किसी भी तस्वीर या वीडियो के अलग-अलग अर्थ निकालकर उसे राजनीतिक विमर्श का विषय बना दिया जाता है। यही कारण है कि योग दिवस जैसे गैर-राजनीतिक आयोजन की एक तस्वीर भी अब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का केंद्र बन गई है।फिलहाल इस मामले पर मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े अथवा भाजपा संगठन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन तस्वीर के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर बहस लगातार तेज होती जा रही है। एक पक्ष इसे भाजपा की विचारधारा और प्रतीकों के प्रति असंवेदनशीलता बता रहा है, तो दूसरा पक्ष इसे विपक्ष की राजनीतिक अवसरवादिता करार दे रहा है।सवाल यह है कि क्या यह वास्तव में किसी प्रतीक का अपमान है या फिर एक सामान्य तस्वीर को राजनीतिक चश्मे से देखकर विवाद का रूप दिया जा रहा है? इसका फैसला जनता और समाज की अपनी-अपनी व्याख्याओं पर निर्भर करेगा, लेकिन इतना तय है कि योग दिवस की यह तस्वीर अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन चुकी है। नोट: उपलब्ध तस्वीर के आधार पर विभिन्न पक्षों द्वारा लगाए जा रहे आरोपों और प्रतिक्रियाओं को समाचार शैली में प्रस्तुत किया गया है। तस्वीर मात्र से किसी व्यक्ति की मंशा या उद्देश्य के बारे में निश्चित निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।


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