तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा महाराष्ट्र में 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का आयोजन रविवार, 21 जून को मेजर ध्यानचंद क्रीड़ांगण में उत्साहपूर्वक संपन्न हुआ। इस वर्ष योग दिवस की थीम ‘स्वस्थ आयु के लिए योग’ रही। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के शिक्षकों, अधिकारियों, कर्मचारियों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने बड़ी संख्या में सहभागिता की।कार्यक्रम का शुभारंभ माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऑनलाइन संबोधन के साथ हुआ। उन्होंने कहा कि योग भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा का अमूल्य उपहार है, जो आज संपूर्ण विश्व को स्वस्थ एवं संतुलित जीवन की दिशा प्रदान कर रहा है। उन्होंने योग को दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बनाने तथा सभी आयु वर्ग के लोगों को नियमित योगाभ्यास अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि योग मनुष्य और प्रकृति के सामंजस्य का अमूर्त रूप है।इस अवसर पर कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि योग केवल शारीरिक स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति के मानसिक और बौद्धिक विकास का भी सशक्त माध्यम है। योग एक मनुष्य को दूसरे मनुष्य से जोड़ते हुए विश्व को एकसूत्र बांधने की असीम क्षमता वाली साधना है। उन्होंने विश्वविद्यालय परिवार से योग को अपने जीवनशैली का हिस्सा बनाने का आग्रह किया। कार्यक्रम की प्रस्तावना संयोजक एवं शारीरिक शिक्षा एवं क्रीड़ा समिति के अध्यक्ष प्रो. फरहद मलिक ने प्रस्तुत की। उन्होंने योग दिवस की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए इसके सामाजिक और स्वास्थ्यगत महत्व को रेखांकित किया।योग प्रशिक्षक संगीता सोमनकर के निर्देशन में प्रतिभागियों ने केंद्रीय कार्यक्रम एवं सामान्य योग प्रोटोकॉल का सामूहिक अभ्यास किया। योगाभ्यास के दौरान विभिन्न आसनों, प्राणायाम तथा ध्यान की प्रक्रियाओं का अभ्यास कराया गया, जिससे उपस्थित प्रतिभागियों में विशेष उत्साह देखने को मिला।कार्यक्रम का संचालन सहायक प्रोफेसर डॉ. संदीप सपकाले ने किया। सह-संयोजक एवं शारीरिक शिक्षा एवं क्रीड़ा समिति के पदेन सचिव डॉ. निशीथ राय ने सभी प्रतिभागियों, आयोजकों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगीत-राष्ट्रगान एवं सामूहिक छायाचित्र के साथ हुआ।योग दिवस के इस आयोजन ने विश्वविद्यालय परिसर में स्वास्थ्य, अनुशासन और सकारात्मक जीवन मूल्यों के प्रति जागरूकता का वातावरण निर्मित किया तथा योग के सार्वभौमिक संदेश को जन-जन तक पहुंचाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस अवसर पर शिक्षक, अधिकारी, कर्मी, शोधार्थी तथा विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।