तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर बेमेतरा जिले में आयोजित मुख्य समारोह उस समय चर्चा और विवाद का विषय बन गया जब कार्यक्रम के प्रचार-प्रसार के लिए लगाए गए पोस्टरों और बैनरों में क्षेत्रीय विधायक एवं भाजपा के वरिष्ठ जनप्रतिनिधि ईश्वर साहू की तस्वीर शामिल नहीं की गई। इस मामले को लेकर भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों में नाराजगी देखी गई, वहीं प्रशासनिक कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं।जानकारी के अनुसार जिले के मुख्य योग दिवस समारोह में शासन-प्रशासन द्वारा बड़े पैमाने पर प्रचार सामग्री तैयार करवाई गई थी। कार्यक्रम स्थल सहित विभिन्न स्थानों पर लगाए गए पोस्टरों में कई जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को स्थान दिया गया, लेकिन क्षेत्र के निर्वाचित विधायक ईश्वर साहू की तस्वीर नहीं होने से राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया। भाजपा कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह केवल एक तकनीकी भूल नहीं बल्कि जनप्रतिनिधि की उपेक्षा का मामला है।भाजपा पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने इसे प्रशासनिक लापरवाही बताते हुए कहा कि विधायक क्षेत्र की जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधि हैं और किसी भी महत्वपूर्ण सरकारी आयोजन में उनकी उपस्थिति और सम्मान सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उनका आरोप है कि यदि पोस्टर निर्माण और अनुमोदन प्रक्रिया में सावधानी बरती जाती तो ऐसी स्थिति उत्पन्न नहीं होती। इस चूक से न केवल विधायक समर्थकों में नाराजगी बढ़ी बल्कि सरकार और संगठन की भी अनावश्यक फजीहत हुई।राजनीतिक जानकारों का मानना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा प्रशासन और सरकार दोनों के लिए असहज स्थिति पैदा करती है। विशेष रूप से तब, जब आयोजन राष्ट्रीय महत्व के कार्यक्रम से जुड़ा हो और उसमें जनप्रतिनिधियों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती हो। ऐसे मामलों में छोटी सी चूक भी बड़े राजनीतिक संदेश का रूप ले सकती है।इधर सोशल मीडिया पर भी पोस्टर से विधायक की तस्वीर गायब होने का मुद्दा तेजी से वायरल हुआ। समर्थकों ने इसे गंभीर त्रुटि बताते हुए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। कई लोगों का कहना है कि यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की असावधानी के कारण यह स्थिति बनी है तो उसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।हालांकि प्रशासन की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है, लेकिन मामले ने जिले की राजनीतिक फिजा को गर्म कर दिया है। भाजपा संगठन के भीतर भी इस बात को लेकर चर्चा है कि आखिर ऐसी कौन-सी परिस्थितियां रहीं जिनके कारण विधायक की तस्वीर पोस्टर में शामिल नहीं हो सकी।अंतरराष्ट्रीय योग दिवस जैसे सकारात्मक और स्वास्थ्य जागरूकता से जुड़े आयोजन के बीच उपजा यह विवाद अब प्रशासनिक कार्यप्रणाली और समन्वय पर सवाल खड़े कर रहा है। आने वाले दिनों में प्रशासन इस मामले पर क्या रुख अपनाता है और जिम्मेदारी किसकी तय होती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।