तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी
छत्तीसगढ़ में नगर सेना (होमगार्ड) विभाग एक बार फिर गंभीर आरोपों के कारण सुर्खियों में है। विभाग में पदस्थ एक कमांडेंट पर होमगार्ड जवानों के आर्थिक शोषण, ड्यूटी और ट्रांसफर के नाम पर कथित वसूली तथा आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप लगाए गए हैं। जवानों के एक समूह द्वारा प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ), मुख्यमंत्री कार्यालय, गृह विभाग और नगर सेना एवं नागरिक सुरक्षा मुख्यालय को ऑनलाइन शिकायत भेजकर पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग किए जाने का दावा किया गया है। शिकायत में कहा गया है कि वर्षों से विभाग के भीतर एक ऐसी व्यवस्था संचालित हो रही है, जिसमें जवानों की मजबूरी को कमाई का माध्यम बनाया गया है और प्रशासनिक अधिकारों का उपयोग कथित रूप से आर्थिक लाभ अर्जित करने के लिए किया जा रहा है।विभागीय सूत्रों का कहना है कि ड्यूटी आवंटन, ट्रांसफर, छुट्टी स्वीकृति, वेतन भुगतान और अन्य विभागीय कार्यों के लिए अनौपचारिक रूप से रकम तय कर दी गई है। जवानों का कहना है कि जो लोग कथित तौर पर निर्धारित राशि देने में सक्षम होते हैं, उन्हें सुविधाजनक स्थानों पर ड्यूटी और मनचाही व्यवस्था उपलब्ध करा दी जाती है, जबकि आर्थिक रूप से कमजोर जवानों को दूरस्थ क्षेत्रों अथवा कठिन ड्यूटियों में भेजा जाता है। इससे विभाग के भीतर असंतोष लगातार बढ़ रहा है और जवानों का मनोबल प्रभावित हो रहा है।विभागीय सूत्रों ने यह भी दावा किया है कि विभाग के भीतर विभिन्न कार्यों के लिए कथित तौर पर एक “रेट कार्ड” संचालित है। आरोपों के अनुसार ड्यूटी लगवाने के लिए पांच हजार रुपये, ट्रांसफर के लिए सात हजार रुपये, पासिंग के लिए तीन हजार रुपये, छुट्टी स्वीकृति के लिए दो हजार रुपये तथा वेतन रिलीज कराने के लिए चार हजार रुपये तक की मांग की जाती है। अन्य सुविधाओं के लिए राशि परिस्थितियों और व्यक्ति विशेष के अनुसार तय होने की बात भी शिकायत में कही गई है। हालांकि इन आरोपों की अभी तक किसी स्वतंत्र एजेंसी द्वारा पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन शिकायत सामने आने के बाद विभागीय हलकों में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है।जवानों का कहना है कि होमगार्ड सैनिक पहले ही सीमित मानदेय और संसाधनों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे में यदि उन्हें अपने अधिकारों से जुड़ी सामान्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं के लिए भी कथित रूप से धन खर्च करना पड़े तो यह उनके सम्मान और अधिकार दोनों पर सीधा प्रहार है। कई जवानों ने नाम सार्वजनिक नहीं करने की शर्त पर दावा किया है कि विभागीय माहौल ऐसा बना दिया गया है कि अधिकांश लोग खुलकर शिकायत करने से भी डरते हैं।मामले का सबसे गंभीर पहलू संबंधित अधिकारी की कथित संपत्तियों को लेकर सामने आया है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि सेवा अवधि के दौरान संबंधित अधिकारी ने अपनी ज्ञात आय के स्रोतों से कहीं अधिक संपत्ति अर्जित की है। आरोपों के अनुसार आलीशान भवन, अचल संपत्तियां और अन्य निवेश ऐसे हैं , जिनकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है। शिकायत में आयकर विभाग, आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (ईओडब्ल्यू), एंटी करप्शन ब्यूरो तथा अन्य सक्षम एजेंसियों से संपत्तियों और वित्तीय लेन-देन की जांच कराने की मांग की गई है। विभागीय सूत्रों का दावा है कि कुछ दस्तावेज और आर्थिक गतिविधियों से जुड़ी जानकारी भी शिकायत के साथ संबंधित विभागों को उपलब्ध कराई गई है।नगर सेना से जुड़े कुछ सेवानिवृत्त अधिकारियों और जानकारों का मानना है कि यदि शिकायतों में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो यह केवल भ्रष्टाचार का मामला नहीं होगा, बल्कि जवानों के अधिकारों के हनन और प्रशासनिक व्यवस्था में गंभीर खामियों का भी प्रमाण होगा। उनका कहना है कि होमगार्ड जवान आपदा, कानून-व्यवस्था और विभिन्न सरकारी अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, इसलिए उनके साथ किसी भी प्रकार का शोषण गंभीर चिंता का विषय है।फिलहाल आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित अधिकारी का पक्ष भी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है। इसके बावजूद शिकायत पीएमओ और राज्य सरकार तक पहुंचने के दावे के बाद मामला गंभीर हो गया है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार और संबंधित विभाग इन आरोपों को कितनी गंभीरता से लेते हैं तथा क्या किसी स्वतंत्र एजेंसी से निष्पक्ष जांच कराई जाती है। यदि जांच प्रारंभ होती है तो यह स्पष्ट हो सकेगा कि ड्यूटी और ट्रांसफर के नाम पर वसूली के आरोपों में कितनी सच्चाई है, कथित रेट कार्ड वास्तव में अस्तित्व में है या नहीं, और संबंधित अधिकारी की संपत्तियां उनकी घोषित आय के अनुरूप हैं अथवा नहीं। फिलहाल पूरे मामले ने होमगार्ड विभाग की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनके जवाब आने वाले समय में जांच के बाद ही सामने आ सकेंगे। ।