नूर मोहम्मद,गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही (सर्वव्यापी)
जीपीएम जिले की मिट्टी की महक और ग्रामीण महिलाओं की मेहनत से तैयार जैविक विष्णुभोग चावल अब प्रदेश स्तर पर अपनी पहचान बना रहा है। जिले की महिलाओं द्वारा उत्पादित इस विशेष पारंपरिक धान को उस समय नई पहचान मिली, जब अरुण साव को जैविक विष्णुभोग चावल भेंट कर जीपीएम की कृषि विरासत और महिला सशक्तिकरण की अनूठी पहल से अवगत कराया गया। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के अंतर्गत संचालित अरपा बिहान महिलास्व-सहायता समूह की महिलाओं द्वारा तैयार जैविक विष्णुभोग चावल को जिला पंचायत उपाध्यक्ष राजा उपेन्द्र बहादुर सिंह ने उप मुख्यमंत्री को भेंट किया। इस दौरान उन्होंने जिले में महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा किए जा रहे आजीविका संवर्धन, जैविक खेती और स्थानीय उत्पादों के विपणन संबंधी प्रयासों की विस्तृत जानकारी भी दी। उन्होंने बताया कि जीपीएम जिले में विष्णुभोग जैसी पारंपरिक धान प्रजातियों के संरक्षण और जैविक उत्पादन को बढ़ावा देकर ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। महिला समूह खेती से लेकर प्रसंस्करण और बाजार तक की पूरी श्रृंखला में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं, जिससे स्थानीय उत्पादों को नई पहचान और बेहतर बाजार मिल रहा है। उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने महिला स्व-सहायता समूहों की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रयास न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करते हैं, बल्कि महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को भी मजबूती प्रदान करते हैं। उन्होंने जिले में संचालित इस अभिनव मॉडल की प्रशंसा करते हुए महिला समूहों और जिला प्रशासन को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।’लोकल से ग्लोबल’ की ओर बढ़ता जीपीएमकभी गांवों तक सीमित रहने वाला विष्णुभोग चावल आज अपनी गुणवत्ता, सुगंध और जैविक उत्पादन के कारण पहचान बना रहा है। महिला स्व-सहायता समूहों के प्रयासों से यह पारंपरिक धरोहर अब प्रदेश स्तर पर सम्मान पा रही है, जो जिले के लिए गर्व और ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा का विषय है।