मानसून से पहले अलर्ट मोड में प्रशासन: कलेक्टर लंगेह ने की आपदा तैयारियों की समीक्षा…. दिए आवश्यक निर्देश।

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विकास नंद/सर्वव्यापी

आगामी मानसून को दृष्टिगत रखते हुए जिले में संभावित बाढ़ एवं प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने आज सेना के अधिकारियों के साथ बैठक कर आपदा प्रबंधन संबंधी तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न होने पर त्वरित राहत एवं बचाव कार्यों के लिए सेना के सहयोग, संसाधनों की उपलब्धता तथा विभिन्न विभागों के बीच समन्वय व्यवस्था पर चर्चा की गई।बैठक में जिला पंचायत सीईओ हेमंत नंदनवार, जम्मू-कश्मीर रायफल के मेजर ऋत्विक सिंह, गोरखा रायफल के मेजर अंकुर तिवारी, अपर कलेक्टर सचिन भूतड़ा, रवि कुमार साहू सहित जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे।कलेक्टर लंगेह ने कहा कि मानसून के दौरान जिले के संवेदनशील एवं बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है। किसी भी आपात स्थिति में जनहानि एवं संपत्ति के नुकसान को न्यूनतम करने के लिए सभी विभागों को पूर्व तैयारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने राहत एवं बचाव कार्यों के लिए आवश्यक उपकरणों, नावों, संचार व्यवस्था तथा आपदा प्रबंधन टीमों की तत्परता की जानकारी भी ली।कलेक्टर ने बाढ़ संभावित क्षेत्रों की सूची तैयार कर सतत निगरानी रखने, सुरक्षित स्थानों की पहचान कर लोगों को वहां पहुंचाने की पूर्व योजना बनाने, बचाव कार्यों हेतु उपकरणों एवं नावों को क्रियाशील रखने तथा प्रशिक्षित बचाव कर्मियों की तैनाती सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने आमजन से भी मौसम संबंधी चेतावनियों एवं प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की।बैठक में कलेक्टर ने जिले में स्थापित वर्षा मापक यंत्रों की जांच कर उन्हें कार्यशील स्थिति में लाने तथा जहां ये यंत्र उपलब्ध नहीं हैं वहां शीघ्र स्थापना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि 1 जून 2026 से जिला कार्यालय के कक्ष क्रमांक 30 (आवक-जावक कक्ष) में 24×7 आपदा नियंत्रण कक्ष संचालित किया जा रहा है, जो वर्षा ऋतु की समाप्ति तक कार्यशील रहेगा। नियंत्रण कक्ष के लिए नोडल एवं सहायक नोडल अधिकारी भी नियुक्त किए गए हैं।कलेक्टर लंगेह ने संवेदनशील एवं पहुंचविहीन क्षेत्रों में खाद्यान्न, नमक, केरोसीन तथा जीवन रक्षक दवाइयों का अग्रिम भंडारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही पेयजल स्रोतों की सफाई, ब्लीचिंग पाउडर की पर्याप्त उपलब्धता, नगरीय क्षेत्रों में नालों की नियमित सफाई तथा जल निकासी के लिए पंपों की व्यवस्था बनाए रखने पर जोर दिया।उन्होंने बड़ी नदियों के जलस्तर की सतत निगरानी रखने, जलाशयों से जल प्रवाह की सूचना समय पर निचले क्षेत्रों तक पहुंचाने तथा राहत शिविरों में स्वच्छता, पेयजल, स्वास्थ्य परीक्षण एवं भीड़ नियंत्रण की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने बाढ़ से होने वाली क्षति की दैनिक जानकारी निर्धारित प्रारूप में राहत आयुक्त कार्यालय एवं राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के पोर्टल पर समय पर अपलोड करने के भी निर्देश दिए।


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