विकास नंद/सर्वव्यापी
जिले के सरायपाली विकासखंड अंतर्गत बलौदा क्षेत्र के ग्राम बेलमुंडी स्थित शिशुपाल पर्वतमाला में बेशकीमती हीरे मिलने की खबर से पूरे क्षेत्र में उत्साह और खुशी का माहौल है। वैज्ञानिक अन्वेषण के दौरान प्राप्त इस सफलता को प्रदेश के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भी इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि इससे छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा में एक नया अध्याय जुड़ गया है।
एनएमडीसी-सीएमडीसी लिमिटेड द्वारा बलौदा-बेलमुंडी डायमंड ब्लॉक में किए गए वैज्ञानिक परीक्षण एवं प्रसंस्करण के दौरान 200 टन बल्क सैंपल से कुल 5 हीरे प्राप्त हुए हैं, जिनका कुल वजन 1.22 कैरेट है। इनमें दो जेम क्वालिटी के हीरे तथा तीन अन्य श्रेणी के हीरे शामिल हैं। इस खोज ने क्षेत्र में हीरा खनिजीकरण की संभावनाओं को प्रमाणित कर दिया है, जिससे भविष्य में बड़े पैमाने पर निवेश, राजस्व वृद्धि और रोजगार सृजन के अवसर खुल सकते हैं।
राज्य शासन को उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार, क्षेत्र में वैज्ञानिक सर्वेक्षण, स्ट्रीम सेडिमेंट सैंपलिंग, भू-भौतिकीय अध्ययन तथा अन्वेषण ड्रिलिंग के आधार पर चिन्हित स्थानों से खनिज सामग्री एकत्रित कर परीक्षण किया गया। विस्तृत परीक्षण के बाद प्राप्त परिणामों ने क्षेत्र की खनिज संपदा की संभावनाओं को नई मजबूती प्रदान की है।मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि यह उपलब्धि प्रदेश की आर्थिक क्षमता और प्राकृतिक संसाधनों के वैज्ञानिक दोहन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार खनिज संसाधनों के वैज्ञानिक अन्वेषण, पारदर्शी प्रबंधन तथा मूल्य संवर्धन आधारित औद्योगिक विकास को प्राथमिकता दे रही है।मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ पहले से ही लौह अयस्क, कोयला, बॉक्साइट और चूना पत्थर जैसे खनिजों के उत्पादन में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। अब हीरों की संभावनाओं की पुष्टि से प्रदेश की खनिज विविधता और अधिक समृद्ध होगी तथा राज्य की खनिज अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।उन्होंने कहा कि सरकार केवल खनिज उत्खनन तक सीमित नहीं है, बल्कि खनिज आधारित उद्योगों, मूल्य संवर्धन इकाइयों और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन को भी बढ़ावा दे रही है। इससे प्रदेश में निवेश और आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी तथा विकसित छत्तीसगढ़ के लक्ष्य को साकार करने में मदद मिलेगी।विशेषज्ञों के अनुसार प्रारंभिक चरण में मिली यह सफलता भविष्य के विस्तृत अन्वेषण कार्यों के लिए महत्वपूर्ण संकेत है। इससे क्षेत्र की भूगर्भीय संरचना, संसाधन क्षमता और संभावित भंडारों के संबंध में व्यापक अध्ययन का मार्ग प्रशस्त होगा। आगामी सर्वेक्षणों और परीक्षणों के माध्यम से क्षेत्र की वास्तविक क्षमता का अधिक सटीक आकलन किया जा सकेगा।
उल्लेखनीय है कि बलौदा-बेलमुंडी डायमंड ब्लॉक से प्राप्त हीरों को सुरक्षित अभिरक्षा में एनएमडीसी के पन्ना स्थित स्ट्रांग रूम में रखा गया है तथा आगे की प्रक्रिया वैज्ञानिक मानकों और नियमानुसार पूरी की जाएगी।इस महत्वपूर्ण खोज ने न केवल महासमुंद जिले बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने की दिशा में एक मजबूत कदम बढ़ाया है। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि आने वाले समय में यह क्षेत्र निवेश, उद्योग और रोजगार का नया केंद्र बनकर उभरेगा।
परंतु अभी केवल प्रारंभिक अन्वेषण में 5 हीरे प्राप्त हुए हैं। इससे क्षेत्र में हीरा होने की संभावना की पुष्टि हुई है, लेकिन बड़े पैमाने पर खनन और आर्थिक लाभ के लिए विस्तृत सर्वेक्षण, भंडार का आकलन और सरकारी स्वीकृतियां आवश्यक होंगी।
यदि आगे के सर्वेक्षणों में पर्याप्त मात्रा में हीरा भंडार मिलता है, तो सरायपाली अंचल के लिए यह खोज आर्थिक और सामाजिक विकास का बड़ा माध्यम बन सकती है।