बिलासपुर/ तरुण कौशिक/ संपादक सर्वव्यापी/
छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार इन दिनों मंत्रिमंडल विस्तार के साथ ही निगम, मंडलों, आयोगों और बोर्डों के साथ ही संसदीय सचिवों की नियुक्ति को लेकर ख़बरनवीस सजगता से काम कर रहे हैं और अपने अखबार, न्यूज चैनल से लेकर वेबपोर्टल पर खूब खबर लिख रहे हैं लेकिन इस बीच सेवानिवृत्त आईएएस अफसरों को लेकर कोई खबर सामने नहीं आ रही है जो सेवानिवृत्त के पश्चात भाजपा में शामिल होकर विधानसभा और लोकसभा चुनाव में टिकट की दावेदारी कर रहे थे। छत्तीसगढ़ की भाजपा की सरकार में अभी दो आईएएस अफसर विधायक हैं जो अपने नौकरी से स्वेच्छा इस्तीफा लेकर भाजपा का दामन थामा था । जिसमें ओमप्रकाश चौधरी वित्त मंत्री है तो नीलकंठ टेकाम केशकाल के विधायक हैं, बाकि सेवानिवृत्त आईएएस अफसरों को भाजपा संगठन में कोई जिम्मेदारी अब तक नहीं मिली है। ऐसे में यह सेवानिवृत्त और अन्य सरकारी अधिचारी – कर्मकारी जो सेवानिवृत्त के बाद भाजपा में शामिल होकर अपने अस्तित्व को कायम रखने का प्रयास किया था ,मगर इन अफसरों को अब तक किसी भी पद की जिम्मेदारी नहीं दिए जाने से भाजपा सरकार से ही नहीं बल्कि अपने जूनियर आईएएस अफसर भले ही अब प्रोटोकॉल के तहत सेवानिवृत्त आईएएस अफसरों के सामने वरिष्ठ बन गये है,उनसे भी यह सब नाराज चल रहे हैं। एक सेवानिवृत्त आईएएस अफसर ने सर्वव्यापी से चर्चा करते हुए कहा की इससे अच्छा को कांग्रेस में शामिल होते तो आज किसी न किसी विधानसभा से विधायक होते या फिर संगठन में कोई जिम्मेदारी मिल जाती लेकिन भाजपा की सत्ता आने के बाद भी हम सेवानिवृत्त आईएएस और अन्य वरिष्ठ अधिकारी कर्मचारी जो भाजपा में शामिल हुए हैं,उन्हें दरकिनार किया जाना , निश्चित रूप से यह हमारा नहीं बल्कि वित्त मंत्री ओमप्रकाश चौधरी और विधायक नीलकंठ टेकाम के लिए शर्म की बात है कि वह अपने बिदारी के वरिष्ठ जनों को पद प्रतिष्ठा दिलाने में सफलता हासिल करने की बात दूर प्रयास तक नहीं कर रहे हैं। ऐसे में निश्चित रूप से भाजपा सरकार के मुखिया विष्णु देव साय को सोचने की आवश्यकता है कि वह सेवानिवृत्त आईएएस अफसरों और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को जो भाजपा में शामिल हैं उन्हें संगठन या फिर निगम, मंडल, आयोग, बोर्ड,मंडी वगैरह में सम्मान जनक पद देकर सम्मान बढ़ाए।