तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी
छत्तीसगढ़ शासन के नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा राज्य के विभिन्न नगर निगमों, नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों में एल्डरमैन नियुक्ति के आदेश जारी कर दिए गए हैं। लंबे समय से प्रतीक्षित इन नियुक्तियों के बाद जहां कई जिलों में राजनीतिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं को जिम्मेदारी मिली है, वहीं विभागीय मंत्री अरुण साव के गृह संभाग बिलासपुर में नियुक्तियां नहीं होने से राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।राज्य सरकार द्वारा जारी आदेशों में कई संभागों और जिलों के नगरीय निकायों को शामिल किया गया, लेकिन बिलासपुर संभाग के निकायों में एल्डरमैन नियुक्ति नहीं किए जाने को लेकर अनेक सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा है कि आखिर जिस संभाग से स्वयं नगरीय प्रशासन मंत्री का राजनीतिक आधार जुड़ा हुआ है, वहीं नियुक्तियों का आदेश क्यों जारी नहीं हो सका।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इसके पीछे संगठनात्मक सहमति, स्थानीय स्तर पर नामों को लेकर असहमति अथवा प्रशासनिक प्रक्रिया में विलंब जैसे कारण हो सकते हैं। हालांकि सरकार या विभाग की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।बिलासपुर संभाग के कई भाजपा कार्यकर्ता और पदाधिकारी भी इस निर्णय को लेकर उत्सुक हैं। उनका कहना है कि अन्य क्षेत्रों में नियुक्तियां होने के बाद अब बिलासपुर संभाग के नगरीय निकायों में भी शीघ्र नियुक्तियां की जानी चाहिए, ताकि स्थानीय निकायों के कार्यों में जनप्रतिनिधियों की सहभागिता बढ़ सके।विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। उनका कहना है कि यदि सरकार पूरे राज्य में एक साथ नियुक्तियां कर सकती है तो फिर बिलासपुर संभाग को अलग रखने के पीछे क्या कारण हैं, इसकी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए।फिलहाल सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि क्या बिलासपुर संभाग में एल्डरमैन नियुक्तियों की दूसरी सूची जारी होगी, या फिर इसके पीछे कोई विशेष प्रशासनिक अथवा राजनीतिक कारण है। सरकार की ओर से स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही इस विषय पर उठ रहे सवालों के जवाब मिल सकेंगे।अब सभी की नजर नगरीय प्रशासन विभाग पर है कि मंत्री अरुण साव के गृह संभाग बिलासपुर में एल्डरमैन नियुक्तियों का इंतजार कब समाप्त होगा।