विकास नंद/ सर्वव्यापी

महासमुंद जिला पंचायत में जनप्रतिनिधियों और मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) हेमंत नंदनवार के बीच चल रहा विवाद अब खुलकर सामने आ गया है। जिला पंचायत अध्यक्ष मोंगरा पटेल के नेतृत्व में आयोजित सामान्य सभा की बैठक में सर्वसम्मति से सीईओ के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित किया गया। इसके बाद मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को 9 सूत्रीय शिकायत पत्र सौंपते हुए सीईओ को तत्काल प्रभाव से महासमुंद से हटाने तथा उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की मांग की गई है।
जिला पंचायत सदस्यों का आरोप है कि सीईओ के कार्यकाल में पंचायत व्यवस्था प्रभावित हुई है और ग्रामीण विकास के कार्यों में अनावश्यक बाधाएं उत्पन्न हो रही हैं। जनप्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि अधिकारियों के रवैये से पंचायतों की कार्यप्रणाली प्रभावित हो रही है और विकास कार्यों की गति धीमी पड़ गई है।
शिकायत पत्र में लगाए गए प्रमुख आरोप
मुख्यमंत्री को भेजे गए 9 सूत्रीय ज्ञापन में जनप्रतिनिधियों ने निम्नलिखित प्रमुख आरोप लगाए हैं—जनप्रतिनिधियों के प्रति कथित रूप से असम्मानजनक व्यवहार।
जिला पंचायत की सामान्य सभा और महत्वपूर्ण विभागीय बैठकों का नियमित आयोजन नहीं करना।
केंद्र एवं राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी समय पर जनप्रतिनिधियों को उपलब्ध नहीं कराना।
वित्तीय आवंटन और विकास कार्यों की प्रगति संबंधी अभिलेखों में पारदर्शिता का अभाव।
पूर्ण हो चुके निर्माण कार्यों के अंतिम भुगतान में तकनीकी जांच के नाम पर अनावश्यक विलंब।
15वें वित्त आयोग की राशि के प्रशासनिक अनुमोदन में कथित देरी।
पूर्व वर्षों की शेष राशि के उपयोग में लापरवाही और वित्तीय प्रक्रियाओं में अनियमितता के आरोप।
विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की कमी, जिससे विकास कार्य प्रभावित होने का दावा।
जनप्रतिनिधियों की शिकायतों एवं क्षेत्रीय प्रस्तावों की लगातार उपेक्षा।
तत्काल हटाने की मांग जिला पंचायत अध्यक्ष सहित सभी सदस्यों ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि ग्रामीण विकास कार्यों में उदासीनता और पंचायत व्यवस्था को प्रभावित करने के आरोपों को देखते हुए सीईओ हेमंत नंदनवार का तत्काल स्थानांतरण किया जाए तथा उनके विरुद्ध आवश्यक विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
आगे क्या?
जिला पंचायत के इस फैसले के बाद महासमुंद की पंचायत राजनीति में नया मोड़ आ गया है। उल्लेखनीय है कि इस मुद्दे पर भाजपा और कांग्रेस, दोनों दलों के जिला पंचायत जनप्रतिनिधि एकजुट दिखाई दे रहे हैं, जिससे मामला और अधिक गंभीर हो गया है।अब निगाहें राज्य शासन के निर्णय पर टिकी हैं। यदि शासन शिकायतों की जांच कर कार्रवाई करता है तो इसका सीधा असर जिले की पंचायत व्यवस्था और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर पड़ सकता है। वहीं, यदि विवाद लंबा खिंचता है तो जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के बीच टकराव और बढ़ने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
फिलहाल महासमुंद में यह मामला राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों दृष्टि से चर्चा का विषय बन गया है। आने वाले दिनों में शासन का फैसला ही तय करेगा कि जिले में ग्रामीण विकास कार्यों की रफ्तार तेज होगी या जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के बीच जारी टकराव और गहराएगा।