कलेक्टर परिवर्तन पर सियासी हलचल, जनता की निगाहें नए कलेक्टर पर। - Sarvavyapi कलेक्टर परिवर्तन पर सियासी हलचल, जनता की निगाहें नए कलेक्टर पर। - Sarvavyapi

कलेक्टर परिवर्तन पर सियासी हलचल, जनता की निगाहें नए कलेक्टर पर।

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तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में कलेक्टर स्तर पर हुए प्रशासनिक परिवर्तन ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। लगभग दो माह पूर्व ही जिले की कमान संभालने वाले डॉ. संतोष कुमार देवांगन के स्थानांतरण के बाद अब आईएएस विजय दयाराम के. ने रविवार को अवकाश के दिन ही पदभार ग्रहण कर तत्काल क्षेत्र का निरीक्षण शुरू कर दिया। उनके इस सक्रिय रुख की सराहना भी हो रही है, वहीं कलेक्टर परिवर्तन के कारणों को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं भी जारी हैं।राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा है कि एक निजी अस्पताल के विरुद्ध प्रशासनिक कार्रवाई तथा कथित रूप से स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के निर्देशों को लेकर मतभेद उत्पन्न हुए थे। हालांकि इन चर्चाओं की किसी भी सरकारी स्तर पर पुष्टि नहीं हुई है और न ही सरकार अथवा संबंधित मंत्री की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान सामने आया है।प्रशासनिक हलकों में यह भी सवाल उठाया जा रहा है कि यदि किसी अधिकारी ने नियमों के अनुरूप कार्य किया हो, तो उसका स्थानांतरण किन परिस्थितियों में किया गया। वहीं दूसरी ओर यह भी कहा जा रहा है कि स्थानांतरण शासन का सामान्य प्रशासनिक अधिकार है और इसे किसी एक घटना से जोड़कर देखना उचित नहीं होगा।अब सबसे बड़ी चर्चा नए कलेक्टर विजय दयाराम के. को लेकर है। पदभार ग्रहण करने के तुरंत बाद उनके द्वारा विभिन्न व्यवस्थाओं का निरीक्षण करने को प्रशासनिक सक्रियता के रूप में देखा जा रहा है। आम जनता और विभिन्न सामाजिक संगठनों की अपेक्षा है कि वे जिले में पारदर्शी प्रशासन, जनसमस्याओं के त्वरित समाधान तथा कानून के अनुरूप निर्णय लेने की परंपरा को आगे बढ़ाएंगे।जिले के नागरिकों का मानना है कि प्रशासन का दायित्व किसी भी राजनीतिक दबाव से ऊपर उठकर संविधान और कानून के अनुरूप कार्य करना है। यदि किसी भी स्तर पर नियमों के विपरीत कार्य कराने का प्रयास होता है, तो उसका विरोध करना एक प्रशासनिक अधिकारी का कर्तव्य माना जाता है। दूसरी ओर यदि ऐसे आरोप निराधार हैं, तो संबंधित पक्षों को भी अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए ताकि भ्रम की स्थिति समाप्त हो सके।फिलहाल जिले में सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि क्या यह परिवर्तन केवल नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है या इसके पीछे कोई अन्य कारण है। इसका उत्तर शासन के आधिकारिक स्पष्टीकरण के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। तब तक यह मामला चर्चाओं और अटकलों का विषय बना हुआ है।


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