सीएम हेल्पलाइन में बढ़ती शिकायतों पर प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह गंभीर, विभागों को जवाबदेही और समयबद्ध निराकरण का संदेश। - Sarvavyapi सीएम हेल्पलाइन में बढ़ती शिकायतों पर प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह गंभीर, विभागों को जवाबदेही और समयबद्ध निराकरण का संदेश। - Sarvavyapi

सीएम हेल्पलाइन में बढ़ती शिकायतों पर प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह गंभीर, विभागों को जवाबदेही और समयबद्ध निराकरण का संदेश।

Share Now

तरुण कौशिक, संपादक, सर्वव्यापी

मुख्यमंत्री जनसंपर्क और सुशासन की सबसे महत्वपूर्ण व्यवस्थाओं में शामिल सीएम हेल्पलाइन को सरकार और जनता के बीच भरोसे का माध्यम माना जाता है। इसी व्यवस्था में लगातार प्राप्त हो रही शिकायतों और उनके समयबद्ध निराकरण को लेकर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह गंभीर नजर आ रहे हैं। शासन स्तर पर यह स्पष्ट संकेत दिए जा रहे हैं कि शिकायतों का केवल कागजी निराकरण पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि वास्तविक समाधान सुनिश्चित करना भी अधिकारियों की जिम्मेदारी होगी।प्रदेश के विभिन्न जिलों से राजस्व, शिक्षा, पंचायत, नगरीय प्रशासन, स्वास्थ्य, विद्युत, वन, खाद्य, लोक निर्माण और अन्य विभागों से संबंधित बड़ी संख्या में शिकायतें सीएम हेल्पलाइन तक पहुंच रही हैं। इनमें कई शिकायतें लंबे समय तक लंबित रहने, संतोषजनक निराकरण नहीं होने अथवा एक ही विषय पर बार-बार शिकायत दर्ज होने की स्थिति भी सामने आती रही है। ऐसे मामलों ने शासन के समक्ष विभागीय कार्यप्रणाली और जवाबदेही को लेकर नए प्रश्न खड़े किए हैं।सूत्रों के अनुसार शासन स्तर पर लगातार समीक्षा की जा रही है कि किन विभागों में शिकायतों की संख्या अधिक है, किन जिलों में निराकरण की गति धीमी है तथा किन अधिकारियों के स्तर पर लापरवाही सामने आ रही है। माना जा रहा है कि शिकायतों के विश्लेषण के आधार पर प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में कदम उठाए जा सकते हैं।प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि सीएम हेल्पलाइन केवल शिकायत दर्ज करने का मंच नहीं, बल्कि शासन की कार्यक्षमता का भी पैमाना बन चुकी है। यदि किसी विभाग में लगातार शिकायतें बढ़ती हैं तो यह उस विभाग की सेवा गुणवत्ता, निगरानी व्यवस्था और जनसंपर्क प्रणाली पर भी सवाल खड़े करता है। वहीं समय पर गुणवत्तापूर्ण समाधान देने वाले विभाग जनता का विश्वास मजबूत करते हैं।विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार शिकायतों का औपचारिक निराकरण तो दर्ज कर दिया जाता है, लेकिन जमीनी स्तर पर समस्या जस की तस बनी रहती है। ऐसी स्थिति में शिकायतकर्ता दोबारा शिकायत दर्ज कराने को विवश होता है। यदि इस प्रवृत्ति पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जाता है तो शासन की पारदर्शिता और विश्वसनीयता दोनों में वृद्धि होगी।सुशासन की अवधारणा तभी सार्थक मानी जाएगी जब आम नागरिक को अपनी समस्या के समाधान के लिए बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। सीएम हेल्पलाइन की सफलता भी इसी बात पर निर्भर करती है कि शिकायतों का निस्तारण केवल रिकॉर्ड तक सीमित न रहकर वास्तविक और स्थायी समाधान में परिवर्तित हो।अब प्रशासनिक हलकों की निगाह इस बात पर है कि प्रमुख सचिव स्तर पर हो रही गंभीर समीक्षा का प्रभाव जिलों और विभागों की कार्यशैली में कितना दिखाई देता है। यदि जवाबदेही तय होती है, लंबित प्रकरणों का प्रभावी समाधान होता है और लापरवाह अधिकारियों पर आवश्यक कार्रवाई की जाती है, तो यह व्यवस्था प्रदेश में सुशासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। वहीं यदि शिकायतें केवल आंकड़ों तक सीमित रहीं, तो जनता का भरोसा बनाए रखना शासन के लिए एक बड़ी चुनौती होगा।


Share Now

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You cannot copy content of this page

error: Content is protected !!