तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी
छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र में बिलासपुर वनवृत्त में औषधीय पौधों की खरीदी एवं वृक्षारोपण कार्यों को लेकर महत्वपूर्ण प्रश्न उठाया गया। बिल्हा विधायक धरमलाल कौशिक ने वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग से वर्ष 2024-25 एवं 2025-26 के दौरान औषधीय पौधों की खरीदी, वृक्षारोपण, व्यय, जीवितता प्रतिशत तथा कथित अनियमितताओं से संबंधित विस्तृत जानकारी मांगी।विधायक ने पूछा कि बिलासपुर वनवृत्त के विभिन्न वनमंडलों में औषधीय पौधों की खरीदी एवं वृक्षारोपण के लिए कितनी राशि स्वीकृत, आवंटित एवं व्यय की गई, पौधे किन नियमों के तहत खरीदे गए, किस प्रजाति के कितने पौधे किस दर पर तथा किन संस्थाओं, समितियों अथवा फर्मों से खरीदे गए। साथ ही यह भी जानकारी चाही कि इन पौधों का रोपण कितने हेक्टेयर क्षेत्र में किया गया तथा 17 जून 2026 की स्थिति में उनका जीवितता प्रतिशत और भौतिक सत्यापन की स्थिति क्या है।प्रश्न के उत्तर में वन मंत्री केदार कश्यप ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2024-25 एवं 2025-26 की विस्तृत जानकारी “प्रपत्र-अ” में तथा बिलासपुर वनवृत्त के अतिरिक्त अन्य वनमंडलों की जानकारी “प्रपत्र-ब” में विधानसभा पुस्तकालय में उपलब्ध कराई गई है।सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न उस समय सामने आया जब विधायक ने पूछा कि क्या पिछले दो वर्षों में औषधीय पौधों की खरीदी एवं वृक्षारोपण कार्यों में अनियमितता, गुणवत्ता में कमी, फर्जी वृक्षारोपण, अधिक दर पर खरीदी अथवा भुगतान संबंधी शिकायतें शासन अथवा विभाग को प्राप्त हुई हैं। इस पर वन मंत्री ने स्पष्ट उत्तर दिया कि पिछले दो वर्षों में इस प्रकार की कोई शिकायत विभाग को प्राप्त नहीं हुई है।हालांकि विधानसभा में उठे इस प्रश्न ने औषधीय पौधों की खरीदी, करोड़ों रुपये के वृक्षारोपण कार्यों की पारदर्शिता, पौधों की वास्तविक जीवितता तथा मैदानी स्तर पर भौतिक सत्यापन जैसे मुद्दों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। अब विधानसभा पुस्तकालय में रखे गए प्रपत्रों के अध्ययन के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि विभिन्न वनमंडलों में किस एजेंसी से कितनी मात्रा में पौधों की खरीदी की गई, किस दर पर भुगतान हुआ तथा रोपित पौधों की वास्तविक स्थिति क्या है।वन विभाग द्वारा भले ही आधिकारिक तौर पर किसी शिकायत के प्राप्त होने से इनकार किया गया हो, लेकिन विधानसभा में उठे इस प्रश्न ने औषधीय पौधों की खरीदी एवं वृक्षारोपण कार्यों की पारदर्शिता और प्रभावशीलता को लेकर नए सिरे से बहस शुरू कर दी है। अब निगाहें पुस्तकालय में उपलब्ध विस्तृत प्रपत्रों पर टिकी हैं, जिनके आधार पर इन कार्यों का तथ्यात्मक विश्लेषण किया जा सकेगा।


