विकास नंद/ सर्वव्यापी
महासमुंद जिले के सरायपाली विकासखंड में लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा कराए गए सड़क निर्माण कार्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्राम कापूडीह से बिरसिंगपाली मार्ग पर लगभग 2 करोड़ 89 लाख 59 हजार रुपये की लागत से निर्मित करीब छह किलोमीटर लंबी डामरीकृत सड़क पहली ही बारिश में जगह-जगह से उखड़ गई और कई स्थानों पर सड़क दो हिस्सों में बंट गई। निर्माण के महज चार महीने के भीतर सड़क की ऐसी बदहाल स्थिति ने विभागीय कार्यप्रणाली, निर्माण एजेंसी और गुणवत्ता नियंत्रण पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।स्थानीय लोगों का आरोप है कि सड़क निर्माण में भारी अनियमितता और घटिया सामग्री का उपयोग किया गया, जिसके कारण पहली ही बारिश सड़क की गुणवत्ता की पोल खोल गई। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद सड़क का इस तरह क्षतिग्रस्त होना शासन की निर्माण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।मामले को लेकर लोक निर्माण विभाग के संबंधित एसडीओ इंजीनियर की कार्यशैली भी संदेह के दायरे में आ गई है। लोगों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य की नियमित मॉनिटरिंग और गुणवत्ता परीक्षण समय पर किया गया होता तो ऐसी स्थिति उत्पन्न नहीं होती। इससे विभागीय निगरानी व्यवस्था की प्रभावशीलता पर भी सवाल उठ रहे हैं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि सड़क निर्माण में तकनीकी मानकों और गुणवत्ता का पालन किया गया होता तो करोड़ों रुपये की लागत से बनी सड़क पहली ही बारिश में क्षतिग्रस्त नहीं होती। ग्रामीणों ने दोषी अधिकारियों और ठेकेदार के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग करते हुए निर्माण कार्य की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
इस पूरे मामले ने एक बार फिर प्रदेश सरकार के सुशासन और पारदर्शी प्रशासन के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि यदि करोड़ों रुपये की सार्वजनिक राशि से बने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित नहीं हो पा रही है, तो जवाबदेही तय होना आवश्यक है।अब देखना यह होगा कि शासन-प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हुए जांच कराता है और यदि अनियमितता सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों एवं ठेकेदार के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है। फिलहाल सड़क की बदहाल स्थिति क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है।


