सादगी, संवेदनशीलता और सुरों के संग प्रशासन: क्या गौरेला-पेंड्रा-मरवाही को नई पहचान देंगे कलेक्टर विजय दयाराम के.? - Sarvavyapi सादगी, संवेदनशीलता और सुरों के संग प्रशासन: क्या गौरेला-पेंड्रा-मरवाही को नई पहचान देंगे कलेक्टर विजय दयाराम के.? - Sarvavyapi

सादगी, संवेदनशीलता और सुरों के संग प्रशासन: क्या गौरेला-पेंड्रा-मरवाही को नई पहचान देंगे कलेक्टर विजय दयाराम के.?

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तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले को नया कलेक्टर मिलने के साथ ही जिले के विकास को लेकर नई उम्मीदें भी जागी हैं। भारतीय प्रशासनिक सेवा के 2015 बैच के अधिकारी विजय दयाराम के. ने 12 जुलाई को अवकाश दिवस पर जिले के कलेक्टर के रूप में पदभार ग्रहण किया। उनके आगमन के साथ ही प्रशासनिक गलियारों से लेकर आम जनता तक यह चर्चा तेज है कि क्या वे अपने पूर्व कार्यकालों की तरह इस आदिवासी बहुल जिले में भी विकास, पारदर्शिता और जनसरोकारों की नई मिसाल स्थापित कर पाएंगे।विजय दयाराम के. का व्यक्तित्व केवल एक प्रशासनिक अधिकारी तक सीमित नहीं है। वे अपनी सादगी, जमीन से जुड़े व्यवहार और जनसंपर्क की शैली के कारण अलग पहचान रखते हैं। कर्नाटक के एक किसान परिवार से आने वाले विजय दयाराम स्वयं कई अवसरों पर कह चुके हैं कि वे जमीन से जुड़े हुए व्यक्ति हैं। बचपन आर्थिक अभावों में बीता, लेकिन कठिन परिस्थितियों के बीच भी उन्होंने शिक्षा को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया। सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग में स्नातक करने के बाद उन्होंने भारतीय प्रशासनिक सेवा में स्थान प्राप्त किया और वर्ष 2015 बैच के आईएएस अधिकारी बने।उनकी कार्यशैली की चर्चा इसलिए भी होती है क्योंकि वे प्रशासन को केवल कार्यालयों तक सीमित नहीं मानते। विभिन्न जिलों में पदस्थापना के दौरान वे कई बार स्थानीय हाट-बाजारों में आम नागरिकों की तरह पहुंचकर लोगों से संवाद करते दिखाई दिए। इस शैली ने उन्हें जनता के बीच सहज और सुलभ अधिकारी की छवि प्रदान की।पूर्व में उन्होंने रामानुजगंज में एसडीएम के रूप में उल्लेखनीय कार्य किए। इसके अतिरिक्त वाड्रफनगर और राजपुर में भी एसडीएम रहते हुए प्रशासनिक दायित्वों का सफल निर्वहन किया। उनके कार्यकाल को लेकर यह कहा जाता है कि उन्होंने आदिवासी क्षेत्रों में जनकल्याण और विकास से जुड़े अनेक प्रयासों को प्राथमिकता दी। बाद के वर्षों में बस्तर क्षेत्र में कलेक्टर के रूप में उनकी कार्यशैली ने भी लोगों का ध्यान आकर्षित किया। प्रशासनिक दक्षता के साथ संवेदनशील दृष्टिकोण उनकी पहचान बनती गई।विजय दयाराम के. की एक और विशेषता उन्हें अन्य अधिकारियों से अलग बनाती है। वे संगीत प्रेमी हैं और गायन में भी रुचि रखते हैं। हाल के दिनों में उनके द्वारा गाया गया गीत सोशल मीडिया और आम लोगों के बीच काफी पसंद किया गया। प्रशासनिक जिम्मेदारियों के साथ कला और संगीत के प्रति उनका लगाव उनके व्यक्तित्व का मानवीय पक्ष भी सामने लाता है। यही कारण है कि लोग उन्हें केवल एक अधिकारी नहीं, बल्कि संवेदनशील और सहज व्यक्तित्व के रूप में भी देखते हैं।गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिला प्राकृतिक संसाधनों, वन संपदा और आदिवासी संस्कृति से समृद्ध क्षेत्र है। इसके बावजूद सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार, पेयजल, पर्यटन और आधारभूत सुविधाओं के क्षेत्र में अभी भी व्यापक संभावनाएं और चुनौतियां मौजूद हैं। ऐसे में जिले की जनता को नए कलेक्टर से काफी अपेक्षाएं हैं। लोगों का मानना है कि यदि विजय दयाराम के. अपनी पूर्व कार्यशैली के अनुरूप प्रशासन को जनकेंद्रित बनाते हैं और विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष ध्यान देते हैं, तो यह जिला विकास की नई दिशा प्राप्त कर सकता है।किसी भी अधिकारी की वास्तविक पहचान उसके पदभार ग्रहण करने से नहीं, बल्कि उसके निर्णयों, कार्यों और परिणामों से बनती है। विजय दयाराम के. के सामने भी यही चुनौती और अवसर दोनों मौजूद हैं। यदि वे पारदर्शिता, जवाबदेही और जनभागीदारी को प्राथमिकता देते हुए जिले की समस्याओं के समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाते हैं, तो गौरेला-पेंड्रा-मरवाही आने वाले वर्षों में आदिवासी अंचल के विकास का एक सफल मॉडल बन सकता है।अब जिले की निगाहें नए कलेक्टर पर टिकी हैं। जनता की अपेक्षाएं बड़ी हैं और समय के साथ उनके कार्य इन उम्मीदों की वास्तविक परीक्षा भी लेंगे। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि विजय दयाराम के. अपने अनुभव, संवेदनशीलता और जनोन्मुखी प्रशासनिक दृष्टिकोण के बल पर गौरेला-पेंड्रा-मरवाही को विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में कितने सफल होते हैं।


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