विकास नंद/ सर्वव्यापी
सरायपाली मानसून के आगमन के साथ जहां भीषण गर्मी से राहत मिलती है, वहीं वातावरण में बढ़ी नमी और उमस के कारण संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। स्व. मोहनलाल चौधरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, सरायपाली के खंड चिकित्सा अधिकारी (बीएमओ) एवं शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. कुणाल नायक ने लोगों से वर्षा ऋतु में खानपान और स्वच्छता को लेकर विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है।डॉ. नायक ने बताया कि इस मौसम में बैक्टीरिया, वायरस और फफूंद तेजी से पनपते हैं, जिससे भोजन और पेय पदार्थ आसानी से दूषित हो जाते हैं। इसके कारण दस्त, फूड पॉइजनिंग, टाइफाइड, वायरल बुखार, सर्दी-जुकाम और अन्य संक्रामक रोगों का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि वर्षा ऋतु में ताजा, पौष्टिक, सुपाच्य और स्वच्छ भोजन का सेवन शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।उन्होंने लोगों को तला-भुना, अत्यधिक मसालेदार तथा खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों से दूरी बनाने की सलाह देते हुए कहा कि बासी भोजन, कटे हुए फल, खुले जूस, चाट, गोलगप्पे और अन्य स्ट्रीट फूड का सेवन करने से बचें। पीने के लिए हमेशा उबला या फिल्टर किया हुआ स्वच्छ पानी ही उपयोग करें तथा घर में बना ताजा और अच्छी तरह पका भोजन ही ग्रहण करें।बीएमओ डॉ. कुणाल नायक ने बताया कि भोजन को हमेशा ढककर रखें, फल और सब्जियों को अच्छी तरह धोकर ही उपयोग करें तथा कच्चे और पके खाद्य पदार्थों को अलग-अलग रखें। उन्होंने दालें, अंकुरित अनाज, हरी पत्तेदार सब्जियां और विटामिन-सी युक्त फल जैसे आंवला, अमरूद एवं संतरा नियमित आहार में शामिल करने की सलाह दी। साथ ही करेला, मेथी, हल्दी, तुलसी और नीम जैसे प्राकृतिक खाद्य पदार्थ भी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक हो सकते हैं।उन्होंने कहा कि पर्याप्त मात्रा में स्वच्छ पानी पीते रहें तथा ग्रीन टी, हर्बल टी, गर्म सूप, खिचड़ी, दलिया और भुट्टे जैसे हल्के एवं सुपाच्य खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता दें। रसोई और खाद्य पदार्थ रखने के स्थान की नियमित सफाई करें तथा फ्रिज में रखे भोजन को दोबारा खाने से पहले अच्छी तरह गर्म करना न भूलें।डॉ. नायक ने सलाह दी कि बारिश में भीगने पर तुरंत सूखे और साफ कपड़े पहनें, ताकि फंगल संक्रमण से बचा जा सके। बच्चों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और कम रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों के खानपान एवं स्वच्छता पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है।उन्होंने लोगों से घर के आसपास पानी जमा नहीं होने देने की अपील करते हुए कहा कि इससे मच्छरों का प्रजनन बढ़ता है और डेंगू, मलेरिया तथा चिकनगुनिया जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। नियमित हल्का व्यायाम, योग और पर्याप्त नींद भी शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बेहतर बनाए रखते हैं।बीएमओ डॉ. कुणाल नायक ने कहा कि यदि लगातार बुखार, उल्टी, दस्त या शरीर में पानी की कमी के लक्षण दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें और स्वयं दवा लेने से बचें। उन्होंने कहा कि मानसून का मौसम आनंददायक है, लेकिन थोड़ी-सी लापरवाही स्वास्थ्य पर भारी पड़ सकती है। स्वच्छ भोजन, सुरक्षित पेयजल, संतुलित एवं पौष्टिक आहार, व्यक्तिगत स्वच्छता और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर मौसमी संक्रमणों से प्रभावी बचाव किया जा सकता


