तरुण कौशिक,संपादक,सर्वव्यापी
बिलासपुर जिला शिक्षा अधिकारी के पद को लेकर लंबे समय से चल रहा विवाद अब न्यायालय की दहलीज तक पहुंचने के बाद नए मोड़ पर आ गया है। हाल ही में प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी का दायित्व संभालने वाले रामेश्वर जायसवाल को हाईकोर्ट के आदेश के बाद पद से हटा दिया गया है। इसके बाद शिक्षा विभाग में एक बार फिर नए जिला शिक्षा अधिकारी की नियुक्ति को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।जानकारी के अनुसार, रामेश्वर जायसवाल को लगभग छह महीने पहले प्राचार्य पद पर पदोन्नति मिली थी। इसके बाद करीब 15 दिन पहले उन्हें बिलासपुर का प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी नियुक्त किया गया। उनकी इस नियुक्ति पर विभाग के भीतर ही कई वरिष्ठ अधिकारियों ने आपत्ति जताई। नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर विभिन्न सवाल उठाए गए और यह आरोप भी लगाए गए कि वरिष्ठता एवं निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। वहीं विभागीय गलियारों में नियुक्ति को लेकर कथित लेन-देन की चर्चाएं भी होती रहीं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पक्षों की ओर से भी इस संबंध में कोई औपचारिक बयान जारी नहीं किया गया है।इसी बीच कुछ वरिष्ठ शिक्षा अधिकारियों ने नियुक्ति प्रक्रिया को चुनौती देते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में याचिका दायर की। मामले की सुनवाई के बाद न्यायालय ने रामेश्वर जायसवाल को प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी के पद से हटाने का आदेश दिया। न्यायालय के इस आदेश के बाद शिक्षा विभाग में प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है और अब इस महत्वपूर्ण पद पर नई व्यवस्था बनाने की कवायद शुरू हो गई है।विभागीय सूत्रों के अनुसार, स्थायी नियुक्ति होने तक गौरेला-पेंड्रा-मरवाही के जिला शिक्षा अधिकारी रजनीश तिवारी को बिलासपुर जिला शिक्षा अधिकारी का अतिरिक्त प्रभार सौंपे जाने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, इस संबंध में अभी तक राज्य शासन अथवा लोक शिक्षण संचालनालय की ओर से कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं किया गया है।उधर, बिलासपुर जैसे महत्वपूर्ण जिले के जिला शिक्षा अधिकारी पद के लिए कई वरिष्ठ अधिकारी भी सक्रिय बताए जा रहे हैं। विभागीय स्तर पर वरिष्ठता, प्रशासनिक अनुभव तथा सेवा अभिलेख के आधार पर नए अधिकारी के चयन को लेकर विचार-विमर्श किए जाने की चर्चा है। माना जा रहा है कि इस बार शासन नियुक्ति प्रक्रिया को पूरी तरह नियमसम्मत और पारदर्शी बनाने का प्रयास करेगा, ताकि भविष्य में किसी प्रकार का कानूनी विवाद उत्पन्न न हो।शिक्षा विभाग के जानकारों का कहना है कि बिलासपुर जिला शिक्षा अधिकारी का पद अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। जिले के हजारों विद्यालयों, शिक्षकों, विद्यार्थियों तथा विभिन्न शैक्षणिक योजनाओं के संचालन एवं निगरानी की जिम्मेदारी इसी कार्यालय के माध्यम से होती है। ऐसे में इस पद पर नियुक्ति पूरी पारदर्शिता, योग्यता और निर्धारित नियमों के अनुरूप होना आवश्यक है।फिलहाल पूरे शिक्षा विभाग और प्रशासनिक महकमे की नजर शासन के अगले निर्णय पर टिकी हुई है। देखना होगा कि सरकार जल्द स्थायी जिला शिक्षा अधिकारी की नियुक्ति करती है या फिर अंतरिम व्यवस्था के तहत किसी वरिष्ठ अधिकारी को अतिरिक्त प्रभार सौंपकर प्रशासनिक कार्य संचालित किए जाते हैं। हाईकोर्ट के आदेश के बाद बिलासपुर जिला शिक्षा अधिकारी का मामला एक बार फिर प्रदेशभर में चर्चा का विषय बन गया है और अब सभी की निगाहें शासन के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।


