तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के मरवाही वनमंडल की वन मंडलाधिकारी (डीएफओ) ग्रीष्मी चांद (2020 बैच आईएफएस) इन दिनों अपने कार्यों को लेकर चर्चा में हैं। लगभग एक वर्ष पहले पदस्थ हुईं ग्रीष्मी चांद ने वनमंडल में कार्यभार संभालने के बाद से पूर्व वर्षों में हुए कार्यों और कथित अनियमितताओं की जांच एवं कार्रवाई की दिशा में कदम उठाए हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार उनकी सख्त कार्यशैली से कई ऐसे लोगों के हित प्रभावित हुए हैं, जो लंबे समय से वन विभाग में प्रभाव बनाए हुए थे।चर्चा यह भी है कि यदि ऐसे समय में उनका स्थानांतरण किया जाता है, जब वे कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के विरुद्ध कार्रवाई कर रही हैं, तो इससे विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं। प्रशासनिक और सामाजिक हलकों में यह संदेश जा सकता है कि ईमानदारी से कार्य करने वाले अधिकारियों को संरक्षण देने के बजाय उनका मनोबल कमजोर किया जा रहा है।वन विभाग में यह भी चर्चा है कि ग्रीष्मी चांद ने कई मामलों में फाइलों की समीक्षा कर जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया शुरू की है। यदि इन प्रयासों के बीच उनका तबादला होता है तो लंबित जांचों और कार्रवाई की गति भी प्रभावित हो सकती है। इससे भ्रष्टाचार के विरुद्ध चल रही प्रक्रिया पर भी असर पड़ने की आशंका व्यक्त की जा रही है।जानकारों का कहना है कि सरकार की मंशा पारदर्शी और जवाबदेह प्रशासन स्थापित करने की है। ऐसे में यदि किसी अधिकारी ने नियमों के तहत कार्रवाई की है, तो उसे पूरा अवसर मिलना चाहिए। बिना स्पष्ट प्रशासनिक कारण के स्थानांतरण होने पर यह धारणा बन सकती है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करने वाले अधिकारियों को पर्याप्त संरक्षण नहीं मिल रहा।अब सबकी निगाहें वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग और राज्य सरकार के अगले निर्णय पर टिकी हैं। यदि ग्रीष्मी चांद को उनके कार्यकाल के बीच स्थानांतरित किया जाता है, तो विपक्ष, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों की ओर से भी सवाल उठना स्वाभाविक होगा कि क्या ईमानदार कार्यशैली ही उनके तबादले का कारण बनी, या इसके पीछे कोई अन्य प्रशासनिक कारण है।


