तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी
छत्तीसगढ़ के वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग में लंबे समय से वनमंडलाधिकारियों (डीएफओ) के स्थानांतरण की चर्चा लगातार बनी हुई है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, दो वर्ष या उससे अधिक समय से एक ही वनमंडल में पदस्थ अधिकारियों के साथ-साथ विभिन्न शिकायतों और विवादों में घिरे कुछ डीएफओ की सूची तैयार किए जाने की चर्चा है। हालांकि अब तक सरकार की ओर से कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं किया गया है, जिससे विभाग के भीतर लगातार अटकलों का दौर जारी है।वन विभाग में सामान्य प्रशासनिक व्यवस्था के तहत समय-समय पर स्थानांतरण किए जाते रहे हैं, ताकि प्रशासनिक निष्पक्षता बनी रहे और एक ही स्थान पर लंबे समय तक पदस्थ रहने से उत्पन्न होने वाली संभावित अनियमितताओं पर रोक लगाई जा सके। लेकिन इस बार अपेक्षित स्थानांतरण सूची में लगातार हो रही देरी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। विभाग के कर्मचारी और अधिकारी भी यह जानना चाहते हैं कि आखिर सूची कब जारी होगी और किन अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी जाएंगी।सूत्रों का कहना है कि कई वनमंडलों में ऐसे डीएफओ पदस्थ हैं, जिन्होंने दो वर्ष से अधिक का कार्यकाल पूरा कर लिया है। वहीं कुछ अधिकारियों के खिलाफ विभिन्न स्तरों पर शिकायतें, जांच और कार्यप्रणाली को लेकर सवाल भी उठते रहे हैं। ऐसे अधिकारियों को हटाने की चर्चा लंबे समय से चल रही है, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस प्रशासनिक निर्णय सामने नहीं आया है।वन विभाग में पारदर्शिता और जवाबदेही की बात करने वाली सरकार के लिए भी यह एक महत्वपूर्ण परीक्षा मानी जा रही है। यदि लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थ अधिकारियों का स्थानांतरण नहीं होता है तो इससे निष्पक्ष प्रशासन की मंशा पर भी सवाल उठ सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित स्थानांतरण किसी भी विभाग में प्रशासनिक दक्षता बनाए रखने का महत्वपूर्ण माध्यम होता है।बताया जा रहा है कि विभागीय स्तर पर कई नामों पर मंथन चल रहा है। कुछ अधिकारियों को बड़े वनमंडलों की जिम्मेदारी दिए जाने की संभावना जताई जा रही है, जबकि कुछ विवादित अधिकारियों को कम महत्वपूर्ण पदों पर भेजने अथवा प्रशासनिक कार्रवाई की भी चर्चा है। हालांकि इन सभी चर्चाओं की पुष्टि केवल आधिकारिक स्थानांतरण आदेश जारी होने के बाद ही हो सकेगी।वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग में वर्तमान समय में कई महत्वपूर्ण योजनाएं संचालित हो रही हैं। ऐसे में सरकार के सामने यह चुनौती भी है कि स्थानांतरण प्रक्रिया निष्पक्ष, पारदर्शी और योग्यता आधारित हो, ताकि योजनाओं के क्रियान्वयन पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।अब सभी की निगाहें राज्य सरकार, वन मंत्री और विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों पर टिकी हुई हैं। यदि निकट भविष्य में स्थानांतरण सूची जारी होती है तो यह केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं होगा, बल्कि वन विभाग की कार्यशैली और सुशासन की दिशा में सरकार की मंशा का भी महत्वपूर्ण संकेत माना जाएगा। वहीं यदि सूची में और अधिक विलंब होता है तो विभाग के भीतर उठ रहे सवाल और तेज हो सकते हैं तथा पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर सरकार को विपक्ष और जनप्रतिनिधियों के सवालों का सामना भी करना पड़ सकता है।


