एक वर्ष से लंबित ऊर्जा विहार कॉलोनी का ज्ञापन: जनदर्शन, हेल्पलाइन और सुशासन के दावों पर उठे सवाल। - Sarvavyapi एक वर्ष से लंबित ऊर्जा विहार कॉलोनी का ज्ञापन: जनदर्शन, हेल्पलाइन और सुशासन के दावों पर उठे सवाल। - Sarvavyapi

एक वर्ष से लंबित ऊर्जा विहार कॉलोनी का ज्ञापन: जनदर्शन, हेल्पलाइन और सुशासन के दावों पर उठे सवाल।

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तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

छत्तीसगढ़ सरकार एक ओर जनदर्शन, मुख्यमंत्री हेल्पलाइन और सुशासन के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर बिलासपुर जिले की ग्राम पंचायत छतौना स्थित ऊर्जा विहार कॉलोनी के रहवासियों की मूलभूत समस्याओं से जुड़ा ज्ञापन पिछले लगभग एक वर्ष से कार्रवाई की प्रतीक्षा कर रहा है। इससे प्रशासनिक व्यवस्था की कार्यप्रणाली और शिकायतों के समयबद्ध निराकरण पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।ऊर्जा विहार कॉलोनी के रहवासियों ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री विजय शर्मा, बिलासपुर कलेक्टर संजय अग्रवाल तथा जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर कॉलोनी में व्याप्त मूलभूत समस्याओं के समाधान की मांग की थी। ज्ञापन में स्पष्ट उल्लेख किया गया था कि ग्राम पंचायत छतौना के आवास पारा हाई स्कूल के सामने विकसित की गई ऊर्जा विहार कॉलोनी में लगभग 60 से 70 परिवार वर्षों से निवास कर रहे हैं, लेकिन आज तक सड़क, पक्की नाली, स्ट्रीट लाइट, पेयजल पाइपलाइन और बरसाती पानी की निकासी जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गई हैं।रहवासियों का आरोप है कि प्लॉट बेचते समय कॉलोनी को सर्वसुविधायुक्त बनाने का वादा किया गया था। लोगों ने बैंक से ऋण लेकर और ग्राम पंचायत से विधिवत अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) प्राप्त कर अपने मकान बनाए, साथ ही पंचायत को निर्धारित कर और शुल्क का भी भुगतान किया। इसके बावजूद उन्हें आज तक आवश्यक नागरिक सुविधाएं नहीं मिल सकीं। स्थिति यह है कि कॉलोनी के लोगों को स्वयं आपसी सहयोग से बिजली के खंभों पर स्ट्रीट लाइट लगानी पड़ी।ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया था कि कॉलोनी विकसित करने वाले भू-व्यवसायियों ने सड़क, नाली और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने का भरोसा दिया था, लेकिन प्लॉट बिक्री के बाद अपने वादों से पीछे हट गए। ऐसे में रहवासियों ने प्रशासन से मांग की थी कि या तो कॉलोनी में तत्काल मूलभूत सुविधाएं विकसित कराई जाएं अथवा वादाखिलाफी करने वाले जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब मुख्यमंत्री स्वयं जनदर्शन के माध्यम से शिकायतें सुन रहे हैं, मुख्यमंत्री हेल्पलाइन संचालित की जा रही है और जिला स्तर पर नियमित जनदर्शन आयोजित किए जा रहे हैं, तब भी यदि एक वर्ष तक किसी ज्ञापन पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तो आम नागरिक न्याय की उम्मीद किससे करे? क्या शिकायतें केवल आवेदन लेने तक सीमित रह जाती हैं या फिर वे सरकारी फाइलों में दबकर रह जाती हैं?ऊर्जा विहार कॉलोनी के रहवासियों का कहना है कि उन्होंने कई बार संबंधित अधिकारियों को मौखिक और लिखित रूप से अपनी समस्याओं से अवगत कराया, लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिला है। बरसात के मौसम में जलभराव की समस्या और अधिक गंभीर हो जाती है, जिससे लोगों का दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है।अब कॉलोनीवासियों ने राज्य सरकार और जिला प्रशासन से मांग की है कि लंबित ज्ञापन पर तत्काल कार्रवाई करते हुए कॉलोनी में सीसी सड़क, पक्की नाली, पेयजल पाइपलाइन, जल निकासी और अन्य आवश्यक मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। उनका कहना है कि यदि समयबद्ध कार्रवाई नहीं होती, तो जनता का प्रशासनिक व्यवस्था और सरकार के सुशासन के दावों पर विश्वास लगातार कमजोर होता जाएगा।अब सबसे बड़ा प्रश्न यही है—यदि मुख्यमंत्री, मंत्री और जिला प्रशासन को सौंपे गए ज्ञापन पर भी एक वर्ष तक कार्रवाई नहीं होती, तो आम नागरिक आखिर अपनी समस्याओं के समाधान और न्याय के लिए किस दरवाजे पर दस्तक दे?


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