प्रतिबंध सिर्फ कागजों में, तबादलों की गाड़ी पटरी पर! शिक्षा विभाग में कौन है असली ड्राइवर? - Sarvavyapi प्रतिबंध सिर्फ कागजों में, तबादलों की गाड़ी पटरी पर! शिक्षा विभाग में कौन है असली ड्राइवर? - Sarvavyapi

प्रतिबंध सिर्फ कागजों में, तबादलों की गाड़ी पटरी पर! शिक्षा विभाग में कौन है असली ड्राइवर?

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कबीरधाम, धनंजय साहू, ब्यूरो चीफ, सर्वव्यापी

छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा विभाग में स्थानांतरण नीति को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। शासन द्वारा स्थानांतरण पर प्रतिबंध लागू होने के बावजूद विभाग में लगातार जारी हो रहे पदस्थापना और स्थानांतरण आदेशों ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सूचना के अधिकार (आरटीआई) से प्राप्त दस्तावेजों और विभागीय आदेशों के अध्ययन के बाद यह सवाल उठने लगा है कि आखिर प्रतिबंध के बावजूद किन परिस्थितियों में अधिकारियों और कर्मचारियों की पदस्थापना बदली जा रही है?दस्तावेजों के अनुसार स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जुलाई 2026 में कई ऐसे आदेश जारी किए गए हैं, जिनमें अधिकारियों और शिक्षकों को प्रतिनियुक्ति से वापस लेकर अन्य स्थानों पर पदस्थ किया गया है। विभाग इन्हें प्रशासनिक आवश्यकता बताते हुए आदेश जारी कर रहा है, लेकिन सवाल यह है कि जब सामान्य स्थानांतरण पर रोक है तो फिर लगातार एकल स्तर पर पदस्थापना परिवर्तन किस नियम और प्रक्रिया के तहत किए जा रहे हैं?*आरटीआई में सामने आई जानकारी ने बढ़ाई हलचल*सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त जानकारी में यह सामने आया है कि स्थानांतरण प्रतिबंध प्रभावी होने के बावजूद विभाग में ऑफलाइन माध्यम से आदेश जारी किए जा रहे हैं। इन आदेशों की प्रक्रिया और पारदर्शिता को लेकर अब कर्मचारी संगठनों के बीच भी चर्चा तेज हो गई है।विभागीय सूत्रों का कहना है कि यदि किसी कर्मचारी अथवा अधिकारी का स्थान परिवर्तन प्रशासनिक कारणों से आवश्यक है तो उसके लिए स्पष्ट नियम, सक्षम अधिकारी की अनुमति और कारणों का उल्लेख होना चाहिए। लेकिन जब ऐसे आदेश लगातार जारी होते हैं तो स्वाभाविक रूप से सवाल उठते हैं कि क्या सभी मामलों में समान प्रक्रिया अपनाई जा रही है?*03 जुलाई के आदेश ने खड़े किए सवाल*स्कूल शिक्षा विभाग मंत्रालय महानदी भवन नवा रायपुर से जारी आदेश क्रमांक ESTB-1/3398/2026/20-3 दिनांक 03 जुलाई 2026 में सोमा घोष, व्याख्याता एलबी गणित को स्वामी आत्मानंद शासकीय हिंदी माध्यम विद्यालय बेमेतरा से शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पाहरा, विकासखंड धमधा जिला दुर्ग में पदस्थ किया गया।आदेश में उन्हें प्रतिनियुक्ति से वापस लेते हुए प्रशासनिक आधार पर आगामी आदेश तक अस्थायी रूप से पदस्थ करने का उल्लेख किया गया है।इसी दिन जारी दूसरे आदेश में शिव कोटेश्वरम्मा मेकला, व्याख्याता रसायन शास्त्र को प्रतिनियुक्ति से वापस लेकर शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मोपका, विकासखंड बिल्हा जिला बिलासपुर में पदस्थ किया गया।अब सवाल यह है कि जब स्थानांतरण प्रतिबंधित है तो प्रशासनिक आधार पर ऐसे आदेशों की संख्या लगातार क्यों बढ़ रही है?10 जुलाई के आदेश में पांच अधिकारियों की बदलीस्कूल शिक्षा विभाग द्वारा 10 जुलाई 2026 को जारी आदेश क्रमांक ESTB-102(1)/409/2026/20-3 में भी पांच अधिकारियों और शिक्षकों को प्रतिनियुक्ति से वापस लेकर नई पदस्थापना दी गई।इस आदेश के तहत— नूर मोहम्मद रिजवी, सहायक प्राध्यापक को उन्नत शिक्षा अध्ययन संस्थान बिलासपुर से शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय चिखली, विकासखंड कसडोल जिला बलौदाबाजार भेजा गया। प्रीति तिवारी को शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बल्दाकछार, विकासखंड कसडोल भेजा गया। विद्या भूषण शर्मा को महासमुंद जिले के सिरपुर विद्यालय में पदस्थ किया गया।डॉ. सलीम जावेद को पलारी विकासखंड के सोनारदेवरी विद्यालय भेजा गया।करीम खान को कसडोल विकासखंड के टुण्डरा विद्यालय में पदस्थ किया गया।इन आदेशों में विभाग ने इसे प्रशासनिक आवश्यकता बताते हुए आगामी आदेश तक अस्थायी पदस्थापना बताया है।*क्या प्रशासनिक आधार बन गया तबादले का नया रास्ता?*सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या “प्रशासनिक आवश्यकता” अब स्थानांतरण प्रतिबंध के दौरान पदस्थापना परिवर्तन का वैकल्पिक रास्ता बन गया है?यदि वास्तव में विभागीय हित में ऐसे निर्णय आवश्यक हैं तो शासन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि इसके लिए क्या मापदंड तय किए गए हैं? कितने मामलों में ऐसी अनुमति दी गई? क्या सभी आवेदनों पर समान प्रक्रिया अपनाई गई या फिर कुछ चुनिंदा मामलों में ही आदेश जारी हुए?*शिक्षक संगठनों में बढ़ रही नाराजगी*शिक्षक संगठनों का कहना है कि यदि स्थानांतरण पर रोक है तो उसका पालन सभी कर्मचारियों के लिए समान होना चाहिए। यदि सरकार ने प्रतिबंध में कोई छूट दी है तो उसका आदेश सार्वजनिक किया जाना चाहिए, ताकि किसी प्रकार की भ्रम की स्थिति न बने।कर्मचारियों का आरोप है कि प्रतिबंध के दौरान यदि प्रभावशाली लोगों के लिए रास्ते खुले रहेंगे तो आम कर्मचारियों के साथ अन्याय की भावना पैदा होगी।*मुख्यमंत्री सचिवालय तक पहुंचा मामला, जवाब का इंतजार*बताया जा रहा है कि इस पूरे मामले की जानकारी शासन स्तर तक पहुंच चुकी है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार इस मामले में कोई जांच कराती है या नहीं।यदि नियमों के अनुरूप आदेश जारी हुए हैं तो सरकार को इसकी प्रक्रिया स्पष्ट करनी चाहिए, वहीं यदि कहीं नियमों की अनदेखी हुई है तो जिम्मेदारी तय होना जरूरी है।*अब उठ रहे पांच बड़े सवाल*स्थानांतरण प्रतिबंध के बावजूद लगातार पदस्थापना आदेश क्यों जारी हो रहे हैं?प्रशासनिक आधार पर स्थानांतरण के लिए क्या स्पष्ट नियम हैं?क्या सभी कर्मचारियों को समान अवसर मिल रहा है या चुनिंदा लोगों को लाभ?ऑफलाइन आदेशों की प्रक्रिया कितनी पारदर्शी है?क्या सरकार इस पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराएगी?स्कूल शिक्षा विभाग के इन आदेशों ने एक बार फिर शासन की स्थानांतरण नीति और प्रशासनिक पारदर्शिता पर बहस छेड़ दी है। अब देखना होगा कि सरकार इन सवालों का जवाब देती है या फिर यह मामला भी विभागीय फाइलों में दबकर रह जाता है।


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