बिलासपुर/ तरुण कौशिक/ संपादक सर्वव्यापी/
प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नाम के अनुरुप उनके कार्यप्रणाली को लेकर साय को अब सांय-सांय शब्द से जोड़ दिया गया है लेकिन विष्णु देव साय की सरकार में राजनीतिक पदों पर नियुक्तियां सांय -सांय नहीं होने से भाजपा के वरिष्ठ कार्यकर्ताओं के साथ ही विभिन्न पदों पर दावेदारी कर रहे नेताओं में सरकार के प्रति आक्रोश पनपने लगा है। जिससे मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भी इंकार नहीं कर सकते हैं। भाजपा की सरकार बने डेढ़ साल होने जा रहा है लेकिन अब तक न तो पूर्ण मंत्री मंडल विस्तार हुआ और न ही संसदीय सचिवों का नियुक्ति हो पाई ,ले देकर निगम, मंडल, आयोग बोर्ड में आधा-अधूरा नियुक्ति कर दी गई है। वहीं अब प्रदेश के विभिन्न जिला सहकारी केन्द्रीय बैंकों में अध्यक्ष और संचालक मंडल की नियुक्ति को लेकर सहकारिता से जुड़े नेताओं को इन बैंकों में नियुक्ति का इंतजार है और जो नेता अध्यक्ष की दावेदारी कर रहे हैं वह सब राजधानी की दौड़ लगाने में लगे हुए हैं लेकिन इस ओर न तो। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ध्यान दें रहे हैं और न ही सहकारिता मंत्री केदार कश्यप..! जबकि सहकारी बैंकों से सीधे छत्तीसगढ़ के किसानों का संबंध जुड़ा है लेकिन अब तक सहकारी बैंको में भी नियुक्ति न हो पाना मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की कमजोरी को उजागर करती है। सहकारिता से जुड़े भाजपा नेताओं का कहना है कि छत्तीसगढ़ राज्य में भले ही मुख्यमंत्री विष्णु देव साय बन चुके हैं लेकिन पर्दे के पीछे सरकार को कौन चला रहा है और किस नेता और अफसर के इशारे पर सारे काम काज हो रहे हैं,यह सबको प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बिलासपुर बिल्हा समारोह से पता चल चुका है लेकिन सहकारी बैंकों में नियुक्ति न होने से सरकार की साख किसानों से टूटती जा रही है इसलिए विष्णु देव साय और सहकारिता मंत्री केदार कश्यप के साथ ही पर्दे के पीछे काम करने वाले आयुर्वेद विभाग से जुड़े नेता जी और उनके चहेते अफसरों को सांय -सांय नियुक्ति कर देनी चाहिए।