छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के अध्यक्ष पद पर 40 से अधिक उम्रदराज बने दावेदार, सरकार निर्णय लेने में असमर्थ..?

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बिलासपुर/ तरुण कौशिक/ संपादक सर्वव्यापी/

पूर्ववर्ती रमन सरकार के समय छत्तीसगढ़ी भाषा को बढ़ावा देने के लिए छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग का गठन किया गया था और इस आयोग में डा रमन सिंह के कार्यकाल में 65 साल पार उम्रदराज साहित्यकारों को अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई,मजे कि बात यह है कि छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग में विशेष रूप से ब्राह्मण समाज से ही अध्यक्ष बनाए गए।वहीं पिछले कांग्रेस सरकार ने छत्तीसगढ़िया वाद कराने में कोई कसर नहीं छोड़ी लेकिन बड़े ही शर्म की बात है कि इस आयोग में अध्यक्ष की बात दूर सदस्यों की नियुक्ति नहीं हो सकी । वहीं अब वर्तमान विष्णु सरकार में इस आयोग में लगभग 40 वरिष्ठ साहित्यकार और सेवानिवृत्त जज भी शामिल हैं जो छत्तीसगढ़ी भाषा को बढ़ावा देने के लिए अध्यक्ष बनने का सपना देख रहे हैं और दो तीन युवा साहित्यकार -पत्रकार इस दौड़ में शामिल हैं जो शुरू से सिर्फ छत्तीसगढ़ी भाषा की बात करते हुए कार्य कर रहे हैं। सूत्रों की मानें तो इस आयोग के दावेदार में जो उम्रदराज साहित्यकार शामिल हैं, उन्हें और उनके करीबी रिश्तेदारों को छत्तीसगढ़ शासन द्वारा राज्य अलंकरण से शामिल किए गए हैं तो कई वरिष्ठ साहित्यकार विभिन्न पदों पर सुशोभित है। ऐसे में उक्त उम्रदराज साहित्यकारों जिनके परिजनों को राज्य अलंकरण से नवाजा गया है, उन्हें छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किए जाते हैं तो निश्चित रुप से यह आज के युवा पीढ़ी के लिए चिंता का विषय होगा। बहरहाल देखना है कि छत्तीसगढ़ की विष्णु देव साय सरकार इस आयोग में अध्यक्ष, सदस्य की नियुक्ति कब तक करते हैं या फिर कांग्रेस सरकार की भांति इस आयोग को खाली रखते हैं।


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