बिलासपुर में होगी कंप्रेस्ड बायो गैस की स्थापना,कछार में बनेगा प्लांट।

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तरुण कौशिक/ संपादक सर्वव्यापी /

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश में छत्तीसगढ़ में नगरीय ठोस अपशिष्ट के निपटारे को लेकर बड़ा कदम उठाया जा रहा है। इसी क्रम में बिलासपुर नगर निगम में कम्प्रेस्ड बायो गैस संयंत्र (सीबीजी) स्थापित किया जा रहा है । बिलासपुर में इस संयंत्र की स्थापना के लिए भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड लगभग 100 करोड़ रूपए का निवेश करेगा। गुरूवार को कलेक्टोरेट सभाकक्ष “मंथन” में एसीएस मनोज पिंगुआ की विशेष मौजूदगी में भारत पेट्रोलियम कार्पोरेशन लिमिटेड, नगर निगम बिलासपुर और छत्तीसगढ़ बायो फ्यूल विकास प्राधिकरण के मध्य त्रिपक्षीय कन्सेशन एग्रीमेंट (CA) में हस्ताक्षर किया गया। इस अवसर पर कलेक्टर संजय अग्रवाल,एसएसपी रजनेश सिंह, नगर निगम कमिश्नर अमित कुमार,सीईओ सीबीडीए सुमित सरकार,हेड बायोफ्यूल्स बीपीसीएल अनिल कुमार पी, नगर निगम के नोडल ऑफिसर अनुपम तिवारी उपस्थित थे।गौरतलब है कि इस साल 17 जनवरी 2025 को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और उप-मुख्यमंत्री अरूण साव की उपस्थिति में बिलासपुर समेत राज्य के अन्य 5 नगर पालिक निगमों में नगरीय ठोस अपशिष्ट से कम्प्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) संयंत्र स्थापना हेतु सीबीडीए, गेल एवं बीपीसीएल के साथ त्रिपक्षीय एमओयू निष्पादित किया गया था। *कछार में प्लांट,रोजाना 5 से 10 मीट्रिक टन बायोगैस का उत्पादन* बिलासपुर में कंप्रेस्ड बायोगैस संयंत्र की स्थापना समीपस्थ कछार में 10 एकड़ जमीन पर किया जाएगा,जिसके लिए निगम ने बीपीसीएल को रियायती दर पर जमीन उपलब्ध करा दिया है। यहां नगर निगम द्वारा पूर्व से ही आरडीएफ प्लांट स्थापित किया गया है। इस भूमि पर संयंत्र स्थापित किए जाने हेतु पूर्व में भारत पेट्रोलियम कार्पोरेशन लिमिटेड / गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड और छत्तीसगढ़ बायोफ्यलू डेवलपमेंट ऑथोरिटी (सीबीडीए) के अधिकारियों द्वारा प्राथमिक सर्वे किया गया है। कंप्रेस्ड बायो गैस (सीबीजी) से प्रतिदिन 5 से 10 मीट्रिक टन का बायोगैस का उत्पादन होगा। इसके लिए प्रतिदिन 150 मिट्रिक टन प्रतिदिन नगरीय ठोस अपशिष्ट (MSW) का उपयोग जैव ईंधन उत्पादन में उपयोग जाएगा। इसके अलावा उपलब्धता के आधार पर अधिशेष बायोमास का उपयोग भी सीबीजी उत्पादन के लिए किया जाएगा।*पर्यावरण को लाभ समेत रोजगार का सृजन*बिलासपुर में इस संयंत्र की स्थापना से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से प्रतिवर्ष लगभग 30 हजार मानव दिवस रोजगार का सृजन होगा। इसके अलावा संयंत्र निर्माण के दौरान भी बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे। संयंत्र में सह उत्पाद के रूप में प्राप्त जैविक खाद से जैविक खेती को प्रोत्साहन मिलेगा। संयंत्र की स्थापना से ग्रीन हाऊस गैस के उत्सर्जन में कमी आएगी और पर्यावरण स्वच्छ होगा। कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) के उपयोग से शहर नेट जीरो उत्सर्जन प्राप्ति की दिशा में अग्रसर होगा।सीबीजी संयंत्र के पूर्ण क्षमता के साथ उत्पादन और विक्रय से प्रतिवर्ष 1 करोड़ रूपए जीएसटी के रूप में प्राप्त होगा।*क्या है कम्प्रेस्ड बायो गैस?* कम्प्रेस्ड बायो गैस (सीबीजी), एनारोबिक सड़व की प्रक्रिया के माध्यम से अपशिष्ट जैसे कृषि अवशेष, मवेशी गोबर, गन्ना निचोड़ से प्राप्त अवशेष, नगरपालिका ठोस अपशिष्ट, सीवेज उपचार संयंत्र अपशिष्ट आदि से बनाई जाती है. शुद्धिकरण के बाद इसे संपीड़ित किया जाता है। इसे कम्प्रेस्ड बायो गैस (सीबीजी) कहा जाता है, जिसमें मीथेन की उच्च मात्र होती है. इसके अलावा, कन्प्रेस्ड बायो गैस उपलब्ध प्राकृतिक गैस के समान है। जो सीएनजी के समान वैकल्पिक मोटर वाहन ईंधन को रूप में उपयोग किया जा सकता है। देश में बायोगैस की खपत को देखते हुए सीबीजी आने वाले सालों में ऑटोमोबाइल, औद्योगिक और वाणिज्यिक उपयोगों में सीएनजी का स्थान लेने की क्षमता रखती है।*कोनी में इंटीग्रेटेड एनर्जी यूनिट,बीपीसीएल ने दी सहमति*इस अवसर पर वाहनों में बायोगैस रिफिलिंग और इलेक्ट्रिक वाहनों के चार्जिंग के लिए इंटीग्रेटेड एनर्जी यूनिट निर्माण को लेकर भी नगर निगम बिलासपुर और बीपीसीएल के मध्य बातचीत हुई। इस मौके पर निगम द्वारा दिए प्रस्ताव पर बीपीसीएल ने यूनिट निर्माण को लेकर अपनी सहमति दी है। कोनी बस डिपो के पास बीपीसीएल को इसके लिए जमीन मुहैया कराया जाएगा। उत्पादित बायो गैस को इस इंटीग्रेटेड एनर्जी यूनिट में बायो गैस ईंधन से चलने वाले वाहनों में भरा जाएगा। इसके अलावा इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग स्टेशन भी रहेगा जिससे वाहनों को चार्ज किया जा सकेगा।


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