बिलासपुर/ तरुण कौशिक/ संपादक सर्वव्यापी/
छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर के संयुक्त संचालक शिक्षा संभाग कार्यालय में शिक्षक साझा मंच द्वारा युक्तियुक्तकरण को लेकर ज्ञापन पत्र सौंपने गया पदाधिकारियों ने यहां पर पदस्थ सहायक संचालक मुकेश मिश्रा के खिलाफ कई आरोप लगाकर कार्रवाई की मांग की है। जिस पर तत्काल संयुक्त संचालक ने जांच कमेटी बनाकर शिकायत की जांच करने का आदेश जारी किए हैं। विभागीय सूत्रों का कहना है कि शिक्षक साझा मंच द्वारा युक्तियुक्तकरण को लेकर बीते शुक्रवार को दर्जन भर शिक्षक संयुक्त संचालक शिक्षा संभाग बिलासपुर कार्यालय पहुंचे थे, जहां पर सहायक संचालक मुकेश मिश्रा पर अभद्र व्यवहार करने के साथ ही शासकीय कार्य के वक्त शराब पीने का आरोप लगाए गए हैं। जबकि विभागीय सूत्रों का दावा है कि मुकेश मिश्रा को एक शिक्षक नेता की पत्नी जिस पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर वर्षों से नौकरी करने की शिकायत पर निष्पक्ष जांच करने के कारण शिक्षक नेता के ग्रुप के साथी मुकेश मिश्रा से चिढ़ने लगे थे और इन पर कभी भी झूठे आरोप लगाकर बदनाम करने की रणनीति तैयार की गई थी। वहीं विभागीय सूत्रों का कहना है कि सहायक संचालक मुकेश मिश्रा लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे हैं,जिसका नियमित रूप से ईलाज चल रहा है और एक पेड़ से कमजोर होने के कारण लड़खड़ा कर चलते हैं लेकिन इन सबको नजर अंदाज कर इन शराब पीने का गंभीर आरोप लगाए गए हैं। जबकि हकीकत यही है कि मुकेश मिश्रा ने एक महिला फर्जी शिक्षाकर्मी जो शिक्षक नेता की पत्नी हैं, उनके खिलाफ जांच करने के कारण मुकेश मिश्रा को बिलासपुर संयुक्त संचालक कार्यालय से हटाने की रणनीति के तहत इस तरह का आरोप लगाए गए हैं। वहीं बताया जा रहा है कि इस पूरे मामले पर जांच कमेटी गठित की गई है , लेकिन जांच कमेटी की बात दूर संयुक्त संचालक ने मुकेश मिश्रा का तत्काल डाक्टरी मुलाहिजा कराना भी उचित नहीं समझे , अगर तत्काल चिकित्सा मुलाहिजा की जाती तो मुकेश मिश्रा शराब के नशे में थे या फिर अस्वस्थ होने से दवाई खाने पीने से उनका जुबान और पैर से लड़खड़ाना साफ और स्पष्ट हो जाता। बहरहाल शिक्षा संभाग बिलासपुर के सूत्रों का दावा है कि मुकेश मिश्रा को फंसाया जा रहा है ,ताकि इन्हें यहां से हटाकर शिक्षक नेता की फर्जी शिक्षा कर्मी पत्नी को बचाया जा सके। ———–///———-फ़र्जी शिक्षा कर्मी पर क्यों नहीं हो रही कार्रवाई..?वहीं शिक्षक नेता की पत्नी पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर वर्षों से शिक्षाकर्मी की नौकरी करने की शिकायतकर्ता ने पूरे साक्ष्य के साथ शिकायत मुख्यमंत्री से लेकर कलेक्टर तक किया था और जांच में नेता जी की पत्नी पर लगे आरोपों को सही पाया गया था और इस मामले की जांच एक बार नहीं ,दो बार नहीं बल्कि दर्जनों बार होने की बात कही जा रही है और सभी जांच में महिला फर्जी शिक्षा कर्मी साबित हो गई है। बावजूद शिक्षा विभाग के जिला, संभाग से लेकर मंत्री तक कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं, आखिर इस फर्जी महिला शिक्षा कर्मी को क्यों और किसके इशारे पर बचाया जा रहा है,समझ से परे है।