बिलासपुर /तरुण कौशिक/ संपादक सर्वव्यापी/
छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा सचिव सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी को जानकर यह आश्चर्य होगा कि उनके ही वरिष्ठ अफसरों द्वारा उनके ईमानदार अधिकारियों को ईमानदारी की सजा अब बदनाम होकर चुकाना पड़ रहा है। बिलासपुर के संयुक्त संचालक शिक्षा संभाग द्वारा एक शिक्षक नेता की धर्मपत्नी की फर्जी शिक्षा कर्मी होने की जांच यहां पर पदस्थ सहायक संचालक मुकेश मिश्रा को जिम्मेदारी दी गई थी। जिन्होंने ईमानदारी से जांच किया और शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारी फ़र्जी शिक्षा कर्मी को बचाने में जी-तोड़ मेहनत कर रहे हैं और वही सहायक संचालक शिक्षा संभाग बिलासपुर मुकेश मिश्रा को इसकी सजा भुगतना पड़ रहा है।
विभागीय सूत्रों ने बताया कि शिक्षक संघ साझा मंच द्वारा संयुक्त संचालक शिक्षा संभाग बिलासपुर कार्यालय का घेराव किया जाना था, इसकी सूचना संयुक्त संचालक, शिक्षा संभाग बिलासपुर कार्यालय को नहीं दिया गया। पुलिस बल आने के बाद पता चला कि घेराव एवं ज्ञापन दिया जायेगा। सर्वप्रथम छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोशियन के सदस्य पहुंचे। जबकि अन्य संगठन बाद में उपस्थित हुए,जब ज्ञापन लेने के लिए में उपस्थित कार्यालय अधिकारी पहुंचे तो उससे पूर्व नारेबाजी चल रही थी ,जब शांति से बात कर रहें थे तो गाली देने कि शुरुआत संघ द्वारा कि गई तथा ज्ञापन देने से इंकार किया गया। उच्चाधिकारी को बुलाने कि मांग कि गई किंतु संयुक्त संचालक शिक्षा संभाग बिलासपुर अवकाश में थे, अन्य सहायक संचालक भी अन्य कार्यों एवं अवकाश में थे। जबकि सभी को प्रेस के माध्यम से ज्ञात हो गया था कि दिनांक 13/6/25 को ये सभी कार्यवाही होगी। तथ्य यह है कि साजिश के तहत ज्ञापन एवं घेराव को सम्हालने कि जिम्मेदारी उपस्थित सहायक संचालक मुकेश मिश्रा को दी गई, किन्तु तेज तर्रार एवं सभी के सहयोगी सहायक संचालक मुकेश मिश्रा को फसाने की साज़िश पूरे मामले में आ रही है। अनेको शिक्षकों से सम्पर्क करने पर पता चला तेजतर्रार सहायक संचालक मुकेश मिश्रा शिक्षक हित में कई उल्लेखनीय कार्य किए हैं लेकिन इन्हे फ़र्जी शिक्षक कर्मी की जांच करना महंगा पड़ा रहा है। ज्ञापन सौंपने के दौरान मुकेश मिश्रा पर गाली गलौज करने के साथ ही शराब के नशे में होने की बात कहीं गई थी। जबकि इस दौरान पुलिस के उच्च अधिकारी भी उपस्थित थे तो पुलिस प्रशासन ने ड्यूटी के दौरान नशे में होने पर मुकेश मिश्रा की डाक्टरी मुलाहिजा क्यों नहीं कराया गया , यह सबसे बड़ी प्रश्न उठ रही है । आखिर कब मुकेश मिश्रा के खिलाफ संघ ने शिकायत किया तो संयुक्त संचालक आरपी आदित्य ने मुकेश मिश्रा के खिलाफ जांच कमेटी गठित की तो उन्होंने सर्वप्रथम डाक्टरी परीक्षण कराना क्यों उचित नहीं समझा। बहरहाल इस मामले पर मुकेश मिश्रा को फसाने की साज़िश के तहत यह सब घटना एक शिक्षक संघ के नेता के इशारे पर होना बताया जा रहा है।