तरुण कौशिक/ संपादक सर्वव्यापी/
छत्तीसगढ़ की विष्णु देव साय सरकार की वर्तमान कार्यप्रणाली को लेकर आम जनों से लेकर ब्यूरोक्रेसी का भी कहना है कि सरकार की कामकाज समझ से परे है। छत्तीसगढ़ में पहली बार ऐसे मुख्यमंत्री देखने को मिल रहा है जो निर्णय लेने में पूरी तरह से विफल नजर आ रहे हैं और सरकार की हर निर्णय केंद्रीय नेताओं के इशारे पर हो रहा है। जिससे मुख्यमंत्री को कठपुतली होने की उपाधि भी मिलने लगी है। कल ही की घटना से यह साफ हो गया कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय निर्णय लेने में सफल नहीं हो पा रहे हैं क्योंकि मुख्य सचिव अमिताभ जैन का सेवानिवृत्त कल हो चुका है लेकिन सीएम ने किसी वरिष्ठ अफसर को मुख्य सचिव की जिम्मेदारी नहीं दे पाए और दोपहर तक केंद्र सरकार ने अमिताभ जैन की सेवा विस्तार कर किया। जिससे मुख्य सचिव के दावेदार की चेहरों पर उदासी देखने को मिली। वहीं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय हर 15 दिन में कैबिनेट की बैठक ले रहे हैं और जनहित को लेकर निर्णय लेने में लगे हुए जो एक अच्छी सरकार की पहचान है लेकिन जिस तरह से छत्तीसगढ़ में मंत्री मंडल विस्तार और शेष बचे निगम, मंडल, आयोग, बोर्ड में नियुक्ति नहीं हुई है उससे सरकार की पूरी तरह से फजीहत हो रही है। जिस पर मुख्यमंत्री से जुड़े अफसरों को इस दिशा में हस्तक्षेप करते हुए संसदीय सचिव, मंत्री मंडल विस्तार से लेकर शेष बचे निगम, मंडल, आयोग बोर्ड में नियुक्ति करने पर जोर देना चाहिए। इसके साथ यह कहना गलत नहीं होगा कि सीधे सादे मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को उनके मंत्रियों की कारगुजारियों के कारण भी बदनामी का सामना करना पड़ सकता है क्योंकि उनके मंत्री प्रदेश की बात दूर अपने ही निर्वाचन क्षेत्र के ग्रामीण,शहर वासियों से पूरी तरह से दूरी बना चुके हैं और यह माननीय जहां पर समारोह का आयोजन होता है, वहीं पहुंच कर खुद जनता से जुड़ने की बात कहते हैं लेकिन जमीनी हकीकत यही है कि विधानसभा चुनाव जीतने और मंत्री बनने के बाद इनकी पावर इतनी बढ़ गई है कि इनके पांव जमीन पर नहीं टिक रहे हैं और अपने ही क्षेत्र की जनता से चार बात सुनने में लगे हुए हैं। जिस तरह से भाजपा की रमन सरकार, अजीत जोगी और भूपेश बघेल की सरकार ने कामकाज किया था और जनता के दिलों में बसे थे,उस नजरिए से विष्णु देव साय की सरकार महतारी वंदन योजना के सिवाए जनता के दिलों को जीतने के लिए कोई बेहतर प्रदर्शन नहीं कर सके हैं। निश्चित रूप से उक्त तमाम बातों को लेकर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को कौन बताए यह समझ नहीं आ रहा है क्योंकि उनके आसपास घूमने वाले नेता चापलूसी करने में लगे हैं तो उनके सचिवालय में पदस्थ अफसरों की एक सीमा है,जिसे वह पार नहीं कर सकते हैं और अगर अफसर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को जमीनी हकीकत से अवगत कराएं तो शायद मुख्यमंत्री सचिवालय से अफसरों की छुट्टी हो सकती है। ऐसे में अफसर भी मुख्यमंत्री के हा में हा मिलाकर अपने कर्तव्यों से मुंह मोड़ लेने में अपनी काबिलियत समझते हैं । निश्चित रूप से मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को अब गंभीरता से जनहित में फैसले लेने के साथ ही अपने मंत्रियों को एसी कमरे से बाहर निकल कर कोई भी गांव शहर का भ्रमण करते हुए आम जनों से जुड़ने की सलाह देने की आवश्यकता है ताकि दो साल सरकार बेहतर प्रदर्शन कर अंतिम चुनावी वर्ष में जनता की दिलों में जगह बनाकर पुनः सरकार बना सके, अन्यथा आज की स्थिति ऐसी हो गई है कि मंत्री अपने क्षेत्र से त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव भी नहीं जीत पाएंगे,अब मुख्यमंत्री विष्णु देव साय जाने उन्हें क्या करना है, क्यों कि हम कलमकार है जो हमें दिखा उसे हमने इस खबर के माध्यम से सरकार और उसके करीबी अफसरों तक पहुंचाने का प्रयास किए हैं।