राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों का प्रतिनियुक्ति पर आरटीओ में आना मतलब उनके साथ होने वाली किसी अनहोनी की आशंका।

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बिलासपुर/ तरुण कौशिक/संपादक सर्वव्यापी/

छत्तीसगढ़ के न्यायधानी बिलासपुर के परिवहन विभाग में प्रतिनियुक्ति में आने के लिए राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियो में होड़ सी लगी हुई है लेकिन इसके दूरगामी परिणाम बोले या लोगो की आह वे भविष्य मे हों या पिछले कर्मो की सजा उन्हें मिलता ही है जो उनके नौकरी के लिए खतरा बोले या स्वयं सें नौकरी छोड़ने की इच्छा पैदा कर जाता है। ऐसे कई उदाहरण है जो उक्त बातों की पुष्टि करता है । जैसे कि हीरा लाल नायक – बिलासपुर परिवहन विभाग में रहते वैसे तो उनकी कई उपलब्धि है जिसमे सें न्यू बस स्टैंड स्थानातरण की कार्यवाही सबसे प्रमुख है, जैसे ही परिवहन विभाग सें प्रतिनियुक्ति समाप्त हुवा बस्तर संभाग मे अपर कलेक्टर के नियुक्ति के दौरान जमीन मुआवजे में अनियमितता का आरोप लगा और शिकायत पर एफआईआर दर्ज हों गया,वर्तमान मे वे सर्वोच्च न्यायालय से ज़मानत पर है। वहीं देवेंद्र केशरवानी – परिवहन विभाग सें प्रतिनियुक्ति समाप्ति उपरांत आपा धापी मे नौकरी सें इस्तीफा दे दिए, लेकिन विश्वास्त सूत्रों की माने तो नौकरी मे वापसी का प्रयास किया गया लेकिन तब तक देर हों चूका था, इस प्रकार अपनी नौकरी गँवा बैठे। प्रेम प्रकाश शर्मा – परिवहन विभाग सें प्रतिनियुक्ति समाप्त उपरांत पाठ्य पुस्तक निगम के महाप्रबंधक बने, पुस्तक को रद्दी मे बेचे जाने के शिकायत पर निलंबित किये गए। शशि कांत कुर्रे – कोरबा rto के बाद अपने मूल विभाग मे वापसी के उपरांत भारतमाला प्रोजेक्ट पर अनियमितता के शिकायत पर सस्पेंड और एफआईआर दर्ज किया गया है जो वर्तमान मे फरार चल रहे है । इसी तरह आनंद रूप तिवारी – छत्तीसगढ़ गठन के उपरांत किसी राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियो मे परिवहन विभाग मे प्रतिनियुक्ति के दौरान निलंबित होने का यह पहला मामला है। हालांकि उनके खिलाफ प्राप्त अनियमितता पर कार्रवाही की चर्चा तो बहुत पहले सें थी लेकिन उक्त प्रकरण पर कार्यवाही सबसे लेट लतीफ हुआ,जिसका कारण जनता भली भांति समझ सकती है!राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियो पर प्रतिनियुक्ति सेवा के दौरान किये गए विभिन्न कार्यों की की शिकायतो की लम्बी फेहरिस्त है लेकिन शासन स्तर पर भी राज्य सेवा के अफसर ही मातहतो के निचे बैठे है, जब तक उन मातहतो की सरपरस्ती उनके ऊपर है तब तक उन पर संभव नहीं है, केवल यही कहा जा सकता है, वैसे वर्तमान मे प्रतिनियुक्ति पर काबिज राज्य प्रशासनिक सेवा के अफसरों की शिकायतों की लम्बी फेहरिस्त है, पर कार्यवाही शायद प्रतिनियुक्ति समाप्ति के बाद हों ••• !


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