बलात्कार का एक आरोपी सुनों क्या कहता है।

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विकास नंद/ सर्वव्यापी/

बिलासपुर से तरुण कौशिक जो कि वर्ष 2015 से …..साहू पिता स्व …. राम ,पति … चंद्रा थाना जैजैपुर वर्तमान जिला सक्ती एवं इनका वर्तमान निवास…. रोड मंगला, बिलासपुर छत्तीसगढ़ में रहती हैं । जो मुझे अपना पति के रुप में अपने सारे दस्तावेज में अंकित कराया है और मुझे भविष्य में झूठे प्रकरणों में फसाने की धमकी देते आ रही है। जिसके कारण मैं अपने मान सम्मान को देखते हुए इन्हें हर महीने 10-15 हजार रुपए देते आया और इसके साथ ही उक्त महिला द्वारा अपने पति के रुप में मेरा नाम सरकारी दस्तावेजों में दर्ज कराने के खिलाफ पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह, भूपेश बघेल, वर्तमान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से लेकर राज्य शासन के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी,जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को शिकायत करते आया परंतु मुझे कोई न्याय नहीं मिल पाया है।इस दौरान उक्त महिला ने पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह से मेरी शिकायत की और पुलिस अधीक्षक ने सिविल लाईन, सरकंडा थाना में निष्पक्ष कार्रवाई करने आदेश दिए। जहां पर संबंधित थानों द्वारा मेरे द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों को आधार मानकर जांच प्रक्रिया में लिया लेकिन बीते सप्ताह महिला थाना ने बिना जांच पड़ताल किए मेरे खिलाफ लिव इन रिलेशनशिप में रहकर शादी का झूठा वादा कर एफआईआर दर्ज किया है। जिससे मेरा और मेरे परिवार का मान सम्मान को ठेस पहुंचा। वहीं …. साहू ने जो मुझे सरकारी दस्तावेजों में पति माना है द्वारा 30-35 लाख रुपए का मकान खरीद कर नहीं देने पर दैहिक शोषण में फसाने की धमकी देती रही, जिसकी शिकायत भी मैंने किया मगर मेरा कोई सुनवाई नहीं हुआ । इस दौरान उनके कहने पर मैं, सामाजिक कार्यकर्ता श्याम मूरत कौशिक, क्रांति साहू, मेरे पड़ोसी रामकुमार कश्यप और उक्त महिला का वकील मंगला चौक के वंदना हाॅस्पिटल के पास एक होटल में बैठकर उक्त महिला को समझाने में लगे, जहां पर उक्त महिला और उसके वकील ने सभी के सामने मुझसे 60 लाख रुपए देने की बात कही वरन दैहिक शोषण में फसाने की बात कही। जिस पर श्याम मूरत कौशिक और क्रांति साहू ने कहा कि 10-15 लाख देने का तरुण का औकात नहीं है तो कहां से तरुण 60 लाख रुपए दे पाएगा। उक्त महिला को बोला तरुण से तुम हर महीने 10 से 15 हजार रुपए लेते हो,तो समन्वय बनाकर जिंदगी जीओ लेकिन उक्त महिला नहीं मानी और मुझ पर बेवजह झूठा आरोप लगाकर मेरे खिलाफ अनाचार करने का आरोप लगाकर महिला थाना बिलासपुर में एफआईआर दर्ज कराई । जिससे मैं पूरी तरह से आहत हूं , मानसिक, सामाजिक रुप से मेरा छवि धूमिल हुई है । मेरे शिकायतों को नजर अंदाज कर रद्दी में फेंका और कार्रवाई नहीं किया। जबकि उक्त महिला की एक शिकायत पर महिला थाना ने एफआईआर दर्ज किया। जिससे मुझे और मेरे परिवार का स्वच्छ छवि बदनाम पर दाग लग गया। मैंने दिनांक 05 जुलाई 2025 को मैंने अपने पक्ष को पूरे सबूत के साथ हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा, राज्यपाल रमेन डेका, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, अपर मुख्य सचिव गृह एवं जेल विभाग मनोज कुमार पिंगुआ, पुलिस महानिरीक्षक डॉ संजीव शुक्ला, एसएसपी रजनेश सिंह और प्रेस क्लब बिलासपुर अध्यक्ष इरशाद अली, पूर्व अध्यक्ष विरेन्द्र गहवई को स्पीड पोस्ट के माध्यम से भेजा है,इस घटना के कारण मुझे हर जगह बात रखना पड़ रहा है, अपना पक्ष मैंने दस्तावेज के साथ सोशल मीडिया पर पहले भी रख चुका हूं पर कोई न्याय नहीं मिला।


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