कबीरधाम/धनंजय चेतन साहू/ ब्यूरो चीफ,सर्वव्यापी/

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय अपने ही पार्टी और सरकार के वरिष्ठ पूर्व मंत्री के चिट्ठी को गंभीरता से लेने के बजाए उनका सचिवालय औपचारिकता निभाने में लगे हुए हैं और संबंधित विभाग के जिम्मेदार अफसरों द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह के कार्यकाल में छत्तीसगढ़ी भाषा को राजभाषा का दर्जा दिया गया लेकिन आज तक इस भाषा का संपूर्ण विकास नहीं हो सका और रमन सरकार के कार्यकाल में जो भी छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के अध्यक्ष बने वह सिर्फ एक वेतनभोगी के रुप में नजर आए ,यह हम नहीं बल्कि छत्तीसगढ़ी भाषा प्रेमी कर रहे हैं। वहीं छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग में अध्यक्ष पद पर नियुक्ति की मांग को लेकर पूर्व मंत्री डॉ कृष्ण मूर्ति बांधी ने अपने एक समर्थक को अध्यक्ष बनाए जाने की मांग को लेकर 13 मई 2025 को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को चिट्ठी लिखते हुए जल्द ही इस आयोग में नियुक्ति किए जाने की बात करते हुए अपने समर्थक को अध्यक्ष बनाए जाने की मांग रखी। जिस पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने गंभीरता से लेने के बजाए डॉ बांधी के चिट्ठी को मुख्यमंत्री सचिवालय ने संस्कृति विभाग के सचिव रोहित यादव को आवश्यक और नियमानुसार कार्रवाई करने के लिए भेज दिया। जबकि इसी मांग को लेकर एक वरिष्ठ पत्रकार सह साहित्यकार ने भी आवेदन पत्र प्रस्तुत किया था। जिसे मुख्यमंत्री सचिवालय के अवर सचिव ने सामान्य प्रशासन विभाग को भेजा और सामान्य प्रशासन विभाग ने अवर सचिव संस्कृति विभाग को भेजा लेकिन संस्कृति विभाग के अवर सचिव के साथ ही सचिव रोहित यादव मुख्यमंत्री सचिवालय के पत्र को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं और छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग में अध्यक्ष पद की नियुक्ति को लेकर संस्कृति विभाग में फाइल धूल चाटने विवश हैं। वहीं किसी भी निगम,मंडल, आयोग, बोर्ड में नियुक्ति करने का विशेषाधिकार मुख्यमंत्री के पास है लेकिन मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भी छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग में अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर गंभीर दिखाई नहीं दे रहे हैं और भाजपा की 18 महीने वाली सरकार के मुखिया विष्णु देव साय छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग में नहीं पता क्यों और किस कारण से नियुक्ति करने में असमर्थ नजर आ रहे हैं। वहीं सोचनीय विषय यह भी है कि छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग में नियुक्ति को लेकर पूर्व मंत्री की चिट्ठी को सीधे मुख्यमंत्री विष्णु देव साय तक पहुंचाने के बजाए मुख्यमंत्री सचिवालय के जिम्मेदार अफसरों ने इसे सामान्य चिट्ठी समझकर रुटीन के तहत संबंधित विभाग को नियमानुसार कार्रवाई करने का आदेश दिया है जो पूर्ण रूप से एक पूर्व मंत्री को अपमानित किए जाने जैसा प्रतीत होती है और यह पूर्व मंत्री ननकी राम कंवर के साथ घटित हो रहे घटनाओं से साफ झलक रहा है कि वर्तमान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के राज में भाजपा के वरिष्ठ नेताओं और पूर्व मंत्रियों का कोई पूछपरख नहीं है तो फिर डॉक्टर कृष्ण मूर्ति बांधी की लिखी चिट्ठी का कोई मतलब ही नजर नहीं आ रहा है। बहरहाल देखना है कि छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग में विष्णु देव साय सरकार कब तक नियुक्ति करते हैं और क्या डॉ कृष्ण मूर्ति बांधी की मांग को गंभीरता से लेते हुए उनके खास समर्थक पत्रकार, साहित्यकार भाजपा के पूर्व ईकाई उपाध्यक्ष, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सामान्य कार्यकर्ता को अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी जाएगी।