तरुण कौशिक/संपादक सर्वव्यापी/
छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले के ग्राम बड़े धरौर, तहसील लोहंडीगुड़ा में लंबे समय से नल-जल आपूर्ति और जल निकासी की गंभीर समस्या से जूझते ग्रामीणों की आवाज आखिरकार शासन-प्रशासन तक पहुँची। समाजसेवी प्रवेश कुमार जोशी द्वारा मुख्यमंत्री को संबोधित पत्र के माध्यम से दर्ज की गई शिकायत (पंजीकरण संख्या GOVCH/E/2025/0001114) ने प्रशासन को हरकत में ला दिया। गैर-कार्यात्मक नल-जल योजना: ग्रामीण महिलाओं को टूटे पाइपों से खुले गड्ढों में झुककर पानी खींचना पड़ता था, जिससे सुरक्षा और स्वास्थ्य का संकट उत्पन्न हो रहा था। जल निकासी का संकट व अतिक्रमण: सीसी रोड के पास जल निकासी चैनलों पर अतिक्रमण के कारण वर्षा जल का घरों में प्रवेश हो रहा था और सड़कें जलमग्न हो रही थीं।लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने बताया कि सभी घरों में टेप नल कनेक्शन दे दिए गए हैं तथा जल जीवन मिशन के अंतर्गत पानी टंकी का निर्माण पूर्ण हो चुका है। हालांकि योजना की टेस्टिंग के दौरान जल आपूर्ति सभी घरों तक नहीं पहुँच पाई है। कुछ परिवारों द्वारा टूल्लू पंप के उपयोग से मुख्य पाइपलाइन से जल खींचने पर उन्हें चेतावनी दी गई है। जल निकासी अतिक्रमण का विषय सरपंच व पंचों द्वारा स्थल निरीक्षण के दौरान निरस्त पाया गया। साथ ही सभी बंद नालियों की सफाई भी पूरी कर ली गई है। प्राप्त प्रतिवेदन के आधार पर शिकायत को नस्तीयबद्ध कर दिया गया है। संबंधित विभागों ने रिपोर्ट कलेक्टर कार्यालय जगदलपुर व राज्य सचिवालय को भेज दी है।यह मामला दर्शाता है कि एक जागरूक नागरिक की पहल से कैसे शासन और प्रशासन को जनसमस्या का संज्ञान लेने पर विवश किया जा सकता है। जोशी द्वारा पत्र के साथ संलग्न किए गए फोटोग्राफ्स ने वास्तविक स्थिति को स्पष्ट रूप से सामने रखा।ग्रामीणों की समस्याओं पर ध्यान देने और उन्हें समयबद्ध समाधान प्रदान करने की आवश्यकता को यह उदाहरण रेखांकित करता है। शासन के समावेशी दृष्टिकोण तथा समाजसेवियों की जागरूकता मिलकर ही समृद्ध एवं सुरक्षित ग्राम व्यवस्था की नींव रख सकती है।