विकासखंड स्तरीय दिव्यांग बच्चों का चिन्हांकन एवं आंकलन शिविर सम्पन्न150 दिव्यांग छात्र-छात्राओं एवं पालकों ने लिया शिविर का लाभ।

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विकास नंद /सर्वव्यापी/

जिलाधीश महासमुंद विनय कुमार लंगेह के निर्देशन एवं डीएमसी महासमुंद रेखराज शर्मा के आदेशानुसार समग्र शिक्षा के अंतर्गत समावेशी शिक्षा योजना के तहत विकासखंड स्तरीय दिव्यांग बच्चों का चिन्हांकन एवं आंकलन शिविर का सफल आयोजन सरायपाली स्थित शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में किया गया।

यह शिविर प्रातः 10:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक आयोजित हुआ।शिविर में कक्षा प्री-प्राइमरी से लेकर 12वीं तक के दिव्यांग छात्र-छात्राओं का स्वास्थ्य परीक्षण समाज कल्याण एवं स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त सहयोग से किया गया। शिविर के दौरान मानसिक, दृष्टि एवं श्रवण बाधित बच्चों से संबंधित दस्तावेज जैसे आधार कार्ड, राशन कार्ड, तथा पासपोर्ट साइज फोटो अनिवार्य रूप से एकत्रित किए गए। नवीनीकरण के लिए तीन वर्ष पूर्व जारी दिव्यांग प्रमाण पत्र की मूल प्रति की जांच की गई।

शिविर में कुल 150 दिव्यांग छात्र-छात्राओं एवं उनके पालकों का पंजीयन किया गया, जिसमें 22 नवीन पंजीयन, 3 नवीनीकरण एवं 5 केसों को महासमुंद रिफर किया गया। जिन विद्यार्थियों के प्रमाण पत्र पूर्व में बन चुके हैं, उन्हें नवीनीकरण की तिथि देकर आगामी शिविर में शामिल होने हेतु सूचित किया गया।शिविर में चिकित्सा, शिक्षा एवं समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों की सक्रिय भूमिका रही। उपस्थित प्रमुख विशेषज्ञों में डॉ. मानस अंकुर सतपथी (अस्थि रोग), डॉ. दयानंद होता (शिशु रोग), डॉ. चंचल लहरी (नाक, कान, गला), मंजूषा चंद्रसेन (नेत्र रोग), टिकेश्वरी गोस्वामी (साइकोलॉजिस्ट), निर्मल साहू (ऑडियोलॉजिस्ट) एवं संतोष कुमार (प्रभारी लिपिक, मेडिकल बोर्ड) शामिल रहे।कार्यक्रम का संचालन शैलेंद्र नायक, व्याख्याता केना द्वारा किया गया। आयोजन में विकासखंड शिक्षा अधिकारी श्री प्रकाशचंद्र मांझी, समग्र शिक्षा के स्रोत समन्वयक सतीश स्वरूप पटेल, बीआरपी रम्भा जायसवाल, स्पेशल एजुकेटर सविता पटेल तथा संकुल समन्वयकों, समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों एवं कंप्यूटर ऑपरेटरों का उल्लेखनीय सहयोग रहा।शिविर स्थल पर उपस्थित पालकों, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के लिए स्वादिष्ट भोजन एवं पेयजल की उत्तम व्यवस्था की गई थी, जिसके लिए पालकों ने प्रशासन एवं आयोजन समिति के प्रति आभार व्यक्त किया।

यह शिविर न केवल दिव्यांग बच्चों के शैक्षणिक व स्वास्थ्य आवश्यकताओं की पूर्ति का माध्यम बना, बल्कि समावेशी शिक्षा की भावना को सशक्त करने की दिशा में एक प्रभावशाली कदम सिद्ध हुआ।


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