तरुण कौशिक/ संपादक सर्वव्यापी/
छत्तीसगढ़ की राजभाषा छत्तीसगढ़ी को बढ़ावा देने के लिए बनाए गए छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग में भाजपा की पूर्व रमन सरकार के कार्यकाल में हमेशा से ब्राह्मण समाज से ही अध्यक्ष की नियुक्ति दी जाती रही है और अब सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार विष्णु सरकार में भी एक बार फिर ब्राह्मण समाज से ही बिलासपुर जिले के बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला के बड़े पिताजी नंदकिशोर शुक्ल को आयोग का अध्यक्ष बनाए जाने की निर्णय लिया गया है,जिसकी घोषणा एक दो दिन के भीतर होने की संभावना जताई जा रही है। बिलासपुर की राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला के बड़े पिताजी बिलासपुर शहर के सरकंडा निवासी 90 वर्षीय नंदकिशोर शुक्ल छत्तीसगढ़ी भाषा के विकास को लेकर लगातार धरना प्रदर्शन करते आ रहे हैं और नंदकिशोर शुक्ल आरएसएस के सक्रिय सदस्य के रुप में जाने जाते हैं जो पूर्व रमन सरकार के समय से ही छत्तीसगढ़ी भाषा में कामकाज न होने के कारण भाजपा सरकार को जमकर घेरते रहे हैं लेकिन मजे कि बात यह है कि कांग्रेस सरकार के राज में राजभाषा आयोग में अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति नहीं होने को लेकर नंदकिशोर शुक्ल की पूरी तरह से मौन रहे और वही पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपने बिलासपुर के प्रथम दौरे पर निकाली स्वागत रैली में रुक कर नंदकिशोर शुक्ल की पैर छूकर आशीर्वाद लिए थे। आज छत्तीसगढ़ की विष्णु देव साय की सरकार में नंदकिशोर शुक्ल के अध्यक्ष पद पर नियुक्ति को लेकर औपचारिकता घोषणा आजकल में होने की बात कही जा रही है। इस आयोग में अध्यक्ष पद पर नंदकिशोर शुक्ल की साथ काम करने वाले पिछ़डा वर्ग से एक युवा पत्रकार-साहित्यकार , वरिष्ठ साहित्यकार विनय पाठक, रामेश्वर शर्मा , दुर्गा प्रसाद पारकर, रितुराज साहू, पीसी लाल यादव ,रामानंद त्रिपाठी आदि इस दौड़ में शामिल थे। अब देखना यह होगा कि बेलतरा के विधायक सुशांत शुक्ला के बड़े पिताजी नंदकिशोर शुक्ल को आयोग में अध्यक्ष पद पर नियुक्ति मिलती है तो भाजपा में भी परिवार वाद की शुरुआत माना जाएगा। बहरहाल यह खबर न्यायधानी से लेकर बस्तर , जशपुर तक चल रहे राजनीतिक चर्चाओं पर लिखी रपट है। देखना है कि विष्णु देव साय की सरकार इस बार छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग में परिवार वाद को बढ़ावा देते हुए बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला के बड़े पिताजी को अध्यक्ष बनाते हैं या नहीं..?वहीं अगर इस बार इस आयोग में किसी ब्राह्मण की नियुक्ति की जाती है तो यही माना जाएगा कि छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग में अध्यक्ष पद को ब्राह्मण समाज के लिए भाजपा सरकार ने आरक्षित कर रखा है। वहीं बताते चलें कि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जब बिलासपुर में पहली बार सीएम बनने के बाद आए थे तो अपना काफिला रुकवा कर नंदकिशोर शुक्ल को उनके घर के सामने खड़े होकर देखते ही भूपेश ने उतरकर उनका आशीर्वाद लिया था।वहीं छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग में अध्यक्ष के पद पर नियुक्ति को लेकर एक संगठन और एक वरिष्ठ युवा पत्रकार जो न केवल बीजेपी के पूर्व पदाधिकारी रहे बल्कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का सदस्य भी हैं , ने उनके द्वारा छत्तीसगढी भाषा के लिए किए गए कार्यों को लेकर राजभाषा आयोग में अध्यक्ष पद पर नियुक्ति करने की मांग को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुख्य संघ संचालक मोहन भागवत से लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, भाजपा प्रदेश प्रभारी नितिन नबीन, प्रदेशाध्यक्ष किरण सिंह देव, संगठन महामंत्री पवन साय को चिट्ठी लिखी गई लेकिन इन लोगों ने चिट्ठी को रद्दी में फेंकने में कोई कसर नहीं छोड़ी है,यह इसलिए कहा जा रहा कि लिखी गई चिट्ठी पर अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई है।