तरुण कौशिक/संपादक – सर्वव्यापी/
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को प्रदेश की राजनीति में लंबा अनुभव है। एक शांत, सरल और सीधे-सादे नेता के रूप में उनकी छवि रही है, लेकिन मुख्यमंत्री बनने के 19 महीने बाद भी वे जनता के दिलों में कोई खास छाप छोड़ने में सफल नहीं हो पाए हैं।भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के खिलाफ उनकी सरकार ने कुछ ठोस कदम जरूर उठाए हैं, जिनकी सराहना हुई है, लेकिन शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास जैसे मूलभूत मुद्दों पर सरकार की निष्क्रियता स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है। हालात इस कदर बिगड़े कि छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय को खुद संज्ञान लेना पड़ा और सरकार को फटकार लगानी पड़ी।हाल ही में सामने आया विधायक ईश्वर साहू का मामला भी सरकार के लिए शर्मिंदगी का कारण बना, जिसमें उन्होंने स्वेच्छानुदान की राशि अपने ही रिश्तेदारों को बांटी। इससे सरकार की नीयत पर सवाल खड़े हुए। वहीं, हकीकत यह है कि जिन वाकई जरूरतमंदों को मदद मिलनी चाहिए, उनकी फाइलें जिलों में धूल फांक रही हैं।विपक्षी कांग्रेस की स्थिति खुद ईडी और एसीबी के मामलों में उलझी होने के कारण कमजोर है। इस कारण भाजपा सरकार को मजबूत विपक्ष का सामना नहीं करना पड़ रहा है, फिर भी जनता के मन में यह सवाल उठ रहा है कि अब तक ऐसा क्या किया गया है जिससे मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सराहना की जा सके?अब मुख्यमंत्री के सामने असली चुनौती यह है कि वे अपने भरोसेमंद प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह जैसे प्रशासनिक अधिकारियों के सहयोग से सरकारी व्यवस्था में कसावट लाएं और ज़मीनी स्तर पर परिणाम दिखाएं। यदि ऐसा नहीं हुआ तो ढाई साल बाद होने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा के लिए सत्ता में वापसी की राह मुश्किल हो सकती है।अब देखना होगा कि आने वाले समय में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय अपनी प्रशासनिक टीम को कैसे साधते हैं और क्या जनता के भरोसे को फिर से जीतने में सफल होते हैं, या फिर सरकार को बार-बार उच्च न्यायालय की फटकार ही झेलनी पड़ेगी।