विकास नंद /सर्वव्यापी/
स्कूल शिक्षा विभाग छत्तीसगढ़ शासन के निर्देशानुसार महासमुंद जिले के सभी 184 संकुलों में बुधवार को पालक-शिक्षक बैठक का आयोजन किया गया। इस आयोजन का उद्देश्य पालकों और शिक्षकों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रगति को सशक्त बनाना था।
इस अवसर पर कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय शेर एवं पचेड़ा में आयोजित संकुल स्तरीय पालक-शिक्षक बैठक में सहभागिता की। उन्होंने पालकों और छात्रों से आत्मीय संवाद करते हुए बच्चों की पढ़ाई, दिनचर्या, और मोबाइल की लत जैसे मुद्दों पर गंभीर चर्चा की।
कलेक्टर ने कहा कि पालक अपने बच्चों की गतिविधियों और पढ़ाई के स्तर को नियमित रूप से परखें तथा स्कूल से लौटने के बाद उनका गृहकार्य पूरा कराने पर विशेष ध्यान दें।बैठक में पालकों द्वारा जाति प्रमाण पत्र से जुड़ी समस्याएं भी सामने रखी गईं, जिन पर कलेक्टर ने शीघ्र समाधान का आश्वासन दिया।
उन्होंने मोबाइल के सीमित उपयोग, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सामूहिक संवाद, और बच्चों को नशे से दूर रखने की बात कही।
कलेक्टर ने “मोर गांव मोर पानी” और “एक पेड़ मां के नाम” जैसे अभियानों की जानकारी भी साझा की और सभी को सहभागिता के लिए प्रेरित किया।
बैठक में जिला शिक्षा अधिकारी विजय कुमार लहरे, डीएमसी रेखराज शर्मा, संबंधित स्कूल के प्राचार्य, सरपंच, संकुल समन्वयक, शिक्षकगण, पालकगण एवं समिति के सदस्य भी उपस्थित रहे।जिले के अन्य स्कूलों में भी नोडल अधिकारियों की निगरानी में पालक-शिक्षक बैठकें सफलतापूर्वक आयोजित की गईं। अधिकारियों को 01-01 संकुल की जिम्मेदारी देकर कार्यक्रम की मॉनिटरिंग करने तथा जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय को प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे।
बैठकों में पालकों को बच्चों के लिए घर में मेरा कोना – स्टडी कॉर्नर, आदर्श दिनचर्या, बच्चा बोलेगा बेझिझक, पब्लिक स्पीकिंग और लीडरशिप, परीक्षा तनाव प्रबंधन, पोषण, स्वास्थ्य परीक्षण, बस्ता रहित शनिवार, न्योता भोज, डिजिटल शिक्षा प्लेटफॉर्म, छात्रवृत्ति और नई शिक्षा नीति संबंधी जानकारियाँ दी गईं।
इस व्यापक संवाद से पालकों की सहभागिता बढ़ी और बच्चों के सर्वांगीण विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया गया।