तरुण कौशिक/संपादक सर्वव्यापी/
छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार में बीते एक वर्ष से मंत्रीमंडल विस्तार की चर्चा थमने का नाम नहीं ले रही। दावेदारों के साथ-साथ आम जनता भी इन चर्चाओं से ऊब चुकी है। अब एक बार फिर से मंत्रीमंडल विस्तार की सुगबुगाहट तेज हो गई है, और इस बार कई चौंकाने वाले नामों की चर्चा जोरों पर है।मौजूदा स्थिति के अनुसार, रक्षाबंधन के दिन से भादों का महीना शुरू हो जाएगा और संभावना जताई जा रही है कि इसी शनिवार या रविवार, या फिर स्वतंत्रता दिवस से ठीक पहले मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मंत्रीमंडल का विस्तार कर सकते हैं।इस संभावित विस्तार में दुर्ग विधायक गजेन्द्र यादव, कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए पुरंदर मिश्रा, अंबिकापुर विधायक राकेश अग्रवाल, और पंडरिया विधायक भावना बोहरा जैसे नए चेहरों के नाम सामने आ रहे हैं। वहीं, पूर्व मंत्री अमर अग्रवाल, राजेश मूणत, और अजय चंद्राकर भी दौड़ में बने हुए हैं, हालांकि अंतिम फैसला अभी स्पष्ट नहीं है।राजनीतिक गलियारों और प्रशासनिक सूत्रों का मानना है कि भाजपा को यदि विष्णु देव साय के नेतृत्व में दोबारा सत्ता हासिल करनी है, तो उसे अनुभवी चेहरों को प्राथमिकता देनी चाहिए। नए मंत्रियों ने बीते 19 महीने के कार्यकाल में न तो कोई ठोस कामकाज दिखाया है और न ही जनता का विश्वास जीता है। उल्टा कई मंत्रियों पर भ्रष्टाचार के आरोप तक लग चुके हैं। मौजूदा स्थिति यह है कि कई मंत्री अपने ही वार्ड, पंचायत या नगर निगम चुनाव तक हारने की स्थिति में पहुंच गए हैं।ऐसे में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को चाहिए कि आगामी चुनावों की रणनीति को ध्यान में रखते हुए केवल अनुभवहीन जोश नहीं, बल्कि अनुभवी नेतृत्व को जगह दें। पूर्व मंत्रियों का प्रशासनिक अनुभव, जनता के बीच पकड़ और राजनीतिक समझ वर्तमान परिस्थिति में बेहद जरूरी साबित हो सकती है।यदि भाजपा दोबारा सरकार बनाना चाहती है, तो यह जरूरी हो गया है कि इस बार मंत्रीमंडल विस्तार सिर्फ जातीय या क्षेत्रीय संतुलन के आधार पर नहीं, बल्कि कार्यकुशलता, अनुभव और जनविश्वास को ध्यान में रखकर किया जाए। नहीं तो जो मंत्री अपने गांव में नहीं जीत पा रहे, वो प्रदेश कैसे जिताएंगे?मुख्यमंत्री को अब गंभीरता से विचार करना होगा कि केवल चेहरे बदलने से नहीं, मूल्यांकन और अनुभव के आधार पर सही चयन से ही भाजपा भविष्य में दोबारा सत्ता की ओर बढ़ सकती है, वरना भगवान ही मालिक है सरकार और संगठन का…!