तरुण कौशिक/ संपादक सर्वव्यापी/
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा महाराष्ट्र में 12-18 अगस्त तक एंटी रैगिंग सप्ताह के अंतर्गत विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। अभियान के अंतर्गत पोस्टर मेकिंग, स्लोगन, लोगो डिजाइन प्रतियोगिता का आयोजन महादेवी वर्मा सभागार में बुधवार, 13 अगस्त को किया गया। कार्यक्रम का समन्वयन डॉ. श्रीनिकेत मिश्र, डॉ. गौरी शर्मा, डॉ. रेनू सिंह, डॉ. समरजीत यादव ने किया।एंटी रैगिंग सप्ताह के अंतर्गत बुधवार 13 अगस्त 2025 को निबंध लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस प्रतियोगिता में कुल 30 विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। प्रतियोगिता का उद्देश्य विद्यार्थियों में रैगिंग के दुष्परिणामों के प्रति जागरूकता बढ़ाना एवं उन्हें इस सामाजिक बुराई के उन्मूलन के लिए प्रेरित करना था। प्रतिभागियों ने अपने निबंधों के माध्यम से न केवल रैगिंग की हानियों पर प्रकाश डाला, बल्कि इसके रोकथाम हेतु सार्थक सुझाव भी प्रस्तुत किए। कार्यक्रम का संचालन एवं समन्वयन डॉ. जगदीश नारायण तिवारी, डॉ. अभिषेक सिंह, डॉ. आम्रपाल शेंदरे ने किया। एंटी रैगिंग सप्ताह के अंतर्गत विद्यार्थियों को रैगिंग की रोकथाम, उसके दुष्परिणाम एवं कानूनी प्रावधानों की जानकारी देने हेतु विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा निर्मित डॉक्यूमेंट्री प्रदर्शित की गई। डॉक्यूमेंट्री के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि रैगिंग जैसी कुप्रथाएं न केवल शैक्षणिक माहौल को नष्ट करती हैं, बल्कि विद्यार्थियों के मानसिक और सामाजिक विकास में भी गंभीर बाधा उत्पन्न करती हैं। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और रैगिंग उन्मूलन की दिशा में सकारात्मक संकल्प व्यक्त किया।इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलानुशासक एवं एसोशिएट प्रोफेसर डॉ. राकेश मिश्र ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि रैगिंग जैसी प्रवृत्तियाँ शैक्षणिक प्रगति के लिए अत्यंत हानिकारक हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को सदैव सकारात्मक सोच, सहयोग और मानवीय संवेदनाओं के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया। प्रस्तावना डॉ. हिमांशु शेखर ने प्रस्तुत की। अपने वक्तव्य में उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय परिसर आपसी सहयोग और भाईचारे का प्रतीक बने, यही इस अभियान का उद्देश्य है। कार्यक्रम के सफल संचालन में सभी संकाय सदस्यों एवं विद्यार्थियों का सहयोग उल्लेखनीय रहा। कार्यक्रम का संचालन डॉ. चंद्रशेखर पांडेय ने किया तथा डॉ. योगेंद्र बाबू ने आभार माना। यह कार्यक्रम विश्वविद्यालय में सुरक्षित, सम्मानजनक एवं समावेशी वातावरण के निर्माण की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण पहल साबित हुआ।