तरुण कौशिक/ संपादक सर्वव्यापी/
बिलासपुर शहर के बीचों-बीच नेहरू चौक स्थित बिल्हा जनपद पंचायत का एक सरकारी भवन वर्षों से एक निजी संस्था के कब्जे में है। बताया जाता है कि छत्तीसगढ़ राज्य की स्थापना के कुछ वर्षों बाद ही राजनीतिक दबदबे और पहुंच के बल पर इस भवन को उक्त संस्था ने अपने कार्यालय संचालन के लिए हासिल कर लिया था।गौर करने वाली बात यह है कि बिल्हा विकासखंड शिक्षा विभाग का मुख्यालय आज तक बिल्हा में नहीं बल्कि जिला मुख्यालय बिलासपुर में एक उधारी के भवन में संचालित हो रहा है। इससे न केवल शिक्षा विभाग के कामकाज पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है बल्कि विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों को भी असुविधा का सामना करना पड़ता है।शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जब नेहरू चौक का यह भवन पूरी तरह से सरकारी है और इसका स्वामित्व बिल्हा जनपद पंचायत के पास है, तो इसे शिक्षा विभाग को उपलब्ध कराकर स्थायी कार्यालय क्यों नहीं दिया जा रहा?जनपद पंचायत और जिला पंचायत के जिम्मेदार अधिकारी इस मामले में चुप्पी साधे हुए हैं। यही वजह है कि निजी संस्थान का दफ्तर वर्षों से बिना किसी बाधा के चलता आ रहा है, जबकि शिक्षा विभाग अपने ही मुख्यालय के लिए भवन की तलाश में है।बिल्हा विकासखंड के अंतर्गत आने वाले सैकड़ों शैक्षणिक संस्थानों से जुड़े प्रशासनिक कार्यों का संचालन आज भी अस्थायी रूप से बिलासपुर के एक उधारी भवन से किया जा रहा है। इसका असर फाइलों के निस्तारण से लेकर विभागीय मीटिंग और अधिकारियों की उपलब्धता तक पर पड़ रहा है।बिल्हा के स्कूल शिक्षा विभाग लगातार मांग कर रहे हैं कि नेहरू चौक स्थित इस भवन को निजी संस्थान से मुक्त कराकर इसे बिल्हा विकासखंड शिक्षा विभाग को सौंपा जाए। इससे न केवल सरकारी संपत्ति का सही उपयोग होगा बल्कि शिक्षा व्यवस्था की कार्यकुशलता और पारदर्शिता में भी सुधार आएगा। लेकिन इस ओर जनपद पंचायत सीईओ और अध्यक्ष,उपाध्यक्ष चुप्पी साधे बैठे हुए हैं।