तरुण कौशिक/ संपादक सर्वव्यापी/
बिलासपुर जिले के बिल्हा और मस्तूरी विधानसभा क्षेत्र के हल्का पटवारी, निर्वाचन सुपरवाइजर और बीएलओ इन दिनों तहसीलदार एवं सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी की मनमानी से बेहद परेशान हैं। मामला मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण कार्य से जुड़ा हुआ है।जानकारी के अनुसार, तहसीलदार कार्यालय से कल 14 सितंबर 2025, रविवार को प्रशिक्षण आयोजित करने का आदेश जारी किया गया है। यह आदेश कर्मचारियों को वाट्सएप में आज ही यानी 13 सितंबर 2025 को थमाया गया। अचानक आए इस निर्देश ने कर्मचारियों में रोष पैदा कर दिया है।पटवारियों, सुपरवाइजरों और बीएलओ का कहना है कि पहले से तय अवकाश के दिन अचानक प्रशिक्षण रख देना, उनकी व्यक्तिगत जिंदगी और पारिवारिक समय पर सीधा प्रहार है।कर्मचारियों का कहना है कि पूरे हफ्ते हम लोग सरकारी काम में लगे रहते हैं। एकमात्र रविवार को ही परिवार के साथ समय बिताने का अवसर मिलता है। ऐसे में छुट्टी वाले दिन प्रशिक्षण थोपना बेहद अमानवीय और अन्यायपूर्ण है।कर्मचारियों ने यह भी सवाल उठाया है कि अगर प्रशिक्षण इतना ही जरूरी था तो इसका आदेश कम से कम एक सप्ताह पूर्व क्यों नहीं जारी किया गया? अचानक आदेश जारी कर कर्मचारियों को ‘बंधुआ मजदूर’ की तरह काम पर बुलाना कहीं से भी उचित नहीं है। कर्मचारियों का कहना है कि क्या चुनावी तैयारी के नाम पर कर्मचारियों से छुट्टी छीनना जायज़ है? क्या तहसीलदार और निर्वाचन अधिकारी खुद भी रविवार को दफ्तर आएंगे? आखिर कर्मचारियों के अधिकार और पारिवारिक जीवन का सम्मान कब होगा?वहीं सूत्रों ने बताया कि हल्का पटवारियों और बीएलओ की ओर से इस निर्णय के खिलाफ सामूहिक आपत्ति दर्ज कराई जा सकती है। कर्मचारी संगठनों का मानना है कि अगर ऐसी मनमानी जारी रही तो आने वाले दिनों में आंदोलन की नौबत भी आ सकती है।