विकास नंद/ सर्वव्यापी/
प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदरदास मोदी का जन्मदिवस आज पूरे देश में उत्साह और आत्ममंथन के साथ मनाया जा रहा है। यह दिन केवल एक नेता का जन्मदिन नहीं, बल्कि संघर्ष, संकल्प और सफलता की मिसाल को याद करने का अवसर है।गुजरात की गलियों में चाय बेचने वाले साधारण बालक से लेकर विश्व राजनीति के केंद्र में भारत की आवाज़ बुलंद करने वाले नेता बनने तक मोदी का सफर लोकतंत्र की असली ताकत को उजागर करता है।
उनकी जीवन यात्रा इस बात का प्रमाण है कि मेहनत, ईमानदारी और साहस से कोई भी सामान्य नागरिक देश के सर्वोच्च पद तक पहुंच सकता है।
मोदी की छवि में आम जनता अपनी झलक देखती है। किसान उन्हें अपना बेटा मानता है, मजदूर अपने पसीने की कदर पाता है और युवा अपनी आकांक्षाओं का भविष्य। यही कारण है कि वे केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि मेहनतकश भारत की तस्वीर बन चुके हैं।
2014 में “सबका साथ, सबका विकास” के नारे के साथ सत्ता में आए मोदी ने डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया और स्टार्ट-अप इंडिया जैसी योजनाओं से युवाओं के लिए नए अवसर खोले। वहीं, आयुष्मान भारत, उज्ज्वला योजना और प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी पहल ने गरीबों में नई उम्मीद जगाई।
छत्तीसगढ़ में भी मोदी सरकार की योजनाओं का असर साफ दिखाई दे रहा है। गांव-गांव तक बिजली पहुंचाना, हर घर में शौचालय और महिलाओं के लिए उज्ज्वला योजना से गैस सिलेंडर उपलब्ध कराना जैसे काम जमीनी स्तर पर बदलाव ला रहे हैं। आदिवासी इलाकों में शिक्षा, स्वास्थ्य और सड़क कनेक्टिविटी को गति मिली है।
हालांकि चुनौतियां भी सामने हैं। बेरोजगारी, महंगाई और किसानों की समस्याएं अब भी बड़ी चिंता बनी हुई हैं। योजनाएं तो अनेक हैं, पर उनका वास्तविक लाभ सब तक कब पहुंचेगा—यह सवाल जनता के मन में बना हुआ है।
मोदी का जीवन संघर्ष से जूझने और लक्ष्य पर टिके रहने की प्रेरणा देता है। चाय की दुकान से शुरू हुआ उनका सपना आज करोड़ों भारतीयों का सपना बन चुका है। जन्मदिवस के इस अवसर पर देशवासियों के लिए भी यह मौका है कि वे प्रधानमंत्री की सोच से प्रेरित होकर अपने विचार और प्रयासों से राष्ट्र को नई दिशा दें।
अयोध्या में राम मंदिर निर्माण से लेकर नए संसद भवन तक, स्वच्छ भारत से लेकर स्टार्ट-अप इंडिया तक—हर पहल में मोदी की दूरदृष्टि और संकल्प की झलक मिलती है।आज उनके जन्मदिवस पर पूरा देश एक स्वर में कह रहा है—“जोहार विकास को।” मोदी अब केवल दिल्ली के प्रधानमंत्री नहीं, बल्कि करोड़ों भारतवासियों के विश्वास और नई छवि के प्रतीक बन चुके हैं।