तरुण कौशिक/संपादक सर्वव्यापी/
छत्तीसगढ़ प्रशासनिक हलकों में इस रविवार को होने वाली कलेक्टर कॉन्फ्रेंस को लेकर हलचल तेज है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में पहली बार नवनियुक्त मुख्य सचिव विकास शील की सक्रिय उपस्थिति रहने वाली है। यह बैठक केवल एक नियमित समीक्षा बैठक नहीं, बल्कि इसे राज्य प्रशासन की नई दिशा और प्राथमिकताओं के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।वहीं मुख्य सचिव पद संभालने के बाद, विकास शील और मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह के समक्ष यह पहली बड़ी चुनौती है, जहां वे प्रदेश के सभी जिलों के कलेक्टरों से सीधे संवाद करेंगे। उनकी पहचान एक सख्त, परिणामोन्मुख और नीति-निपुण अफसर के रूप में रही है। माना जा रहा है कि वे प्रशासनिक ढांचे में उत्तरदायित्व, पारदर्शिता और समयबद्धता पर जोर देंगे।सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री इस बैठक में विकास योजनाओं की जमीनी स्थिति, राजस्व प्रबंधन, मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास, जल जीवन मिशन और राज्य सरकार की नई योजनाओं की प्रगति पर विस्तृत समीक्षा करेंगे। सरकार चाहती है कि जनता को सीधा लाभ पहुंचे और योजनाओं का ठोस असर दिखे।कई जिलों से योजनाओं के क्रियान्वयन में सुस्ती और अफसरों की लापरवाही की शिकायतें मिली हैं। ऐसी स्थिति में यह बैठक कई कलेक्टरों के लिए ‘परफॉर्म या ट्रांसफर’ वाली चेतावनी साबित हो सकती है। मुख्यमंत्री साय के प्रशासनिक रुख को देखते हुए यह अनुमान लगाया जा रहा है कि कमजोर प्रदर्शन वाले जिलों पर कार्यवाही भी संभव है।यह देखना दिलचस्प होगा कि नए मुख्य सचिव विकास शील अपनी भूमिका को केवल औपचारिक उपस्थिति तक सीमित रखते हैं या राज्य की नौकरशाही में वास्तविक परिवर्तन की शुरुआत करते हैं। अफसरशाही में माना जा रहा है कि यदि विकास शील ने अपनी पहचान के अनुरूप निर्णायक कदम उठाए, तो यह बैठक आने वाले महीनों की प्रशासनिक दिशा तय कर सकती है।रविवार की यह कॉन्फ्रेंस केवल समीक्षा नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव के साथ ही उनके प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह के संयुक्त नेतृत्व का पहला वास्तविक परीक्षण होगी। राज्य की विकास गति, अफसरों की जवाबदेही और जनता के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता तीनों के बीच यह बैठक एक संतुलन साधने की कोशिश के रूप में देखी जा रही है।


