संपादक के कलम से...न्याय के सिंहासन ले गूंज उठिस छत्तीसगढ़। - Sarvavyapi संपादक के कलम से...न्याय के सिंहासन ले गूंज उठिस छत्तीसगढ़। - Sarvavyapi

संपादक के कलम से…न्याय के सिंहासन ले गूंज उठिस छत्तीसगढ़।

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तरुण कौशिक/संपादक सर्वव्यापी/

छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय आजकल चर्चा के बीच मं हवय। कारण ये ह कि मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा के वो ऐतिहासिक अऊ साहसिक फैसला जऊन ले सिरिफ न्याय व्यवस्था मं नवा जोश आय ह, बल्कि सरकार अऊ प्रशासन ला अपन जिम्मेदारी के आईना देखे ला मजबूर कर दिस। न्यायपालिका के गरिमा अऊ जनता के हक ला जेन ठन वो दृढ़ता अऊ निडरता ले बचावत हवंय, वो ह छत्तीसगढ़ के न्याय इतिहास मं नवा अध्याय लिख दीस हवय।मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा ह हाल के दिन मं कई ऐसे आदेश जारी करे हवंय, जेन ले प्रशासन के ढर्रा पर सवाल उठ गे हवय।पर्यावरण, सरकारी उदासीनता, भ्रष्टाचार, शहरी अव्यवस्था अऊ नागरिक हक जइसने मुद्दा मं अदालत ह सरकार ले कड़ा जवाब मांगे हवय।वो ह साफ कहे हवंय – “प्रशासन के काम जनता के सेवा करना हवय, जनता ला तंग करना नइ। अगर शासन-प्रशासन अपन जिम्मेदारी ले मुँह मोड़ही, त न्यायपालिका चुप नइ रही।”हाईकोर्ट ह नगर निकाय मं कचरा निस्तारण के गड़बड़ी, नाला सफाई मं लापरवाही, सड़क निर्माण मं भ्रष्टाचार, अवैध निर्माण, पर्यावरण प्रदूषण, शासकीय जमीन मं कब्जा अऊ लोक सेवा मं पारदर्शिता के विषय मं सख्त आदेश दे हवे।अदालत ह हर मामला मं अफसर मन के व्यक्तिगत जवाबदेही तय करे हवय अऊ रिपोर्ट पेश करे बर कहे हवय।ये आदेश के बाद विभाग मं हड़कंप मच गे हवय – अफसर मन घलो अब फाइल धकेलना बंद कर, खुद रिपोर्ट बनावत हवंय।राज्य के कई विभाग मं अब ये चर्चा आम हो गे हवय – “अब लापरवाही नइ चलही।”मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा के सख्त रुख ले अब वो दबाव बन गे हवय, जेन के जरूरत बछर ले महसूस होवत रहिस।एक वरिष्ठ अधिकारी कहिस – “मुख्य न्यायाधीश साहब के तेवर देखके अब कोनो अधिकारी ह फाइल दबाय के हिम्मत नइ करत। सब्बो अब रिपोर्ट बने मं जुट गे हवंय।”मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा के आदेश ले आम जनता मं भरोसा के नवा लहर दौड़ गे हवय।लोगन कहत हवंय – “जब सरकार अऊ प्रशासन अपन जिम्मेदारी ले भाग जाथे, त न्यायालये जनता के आखिरी उम्मीद बन जाथे।”सामाजिक कार्यकर्ता मन के कहना हवय कि सिन्हा साहब ह भ्रष्टाचार, देरी अऊ सरकारी निष्क्रियता के खिलाफ जऊन आवाज उठाइन, वो ह जनता के हक बचाए बर जरूरी कदम आय।मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा ह ये साबित कर दिस हवंय कि न्यायपालिका सिरिफ कानून के किताब मं नइ, बल्कि लोकतंत्र के वो स्तंभ आय जऊन जनता के आवाज ला सबसे बुलंद करत हवय।वो ह अपन आदेश ले ये संदेश दे हवंय – “न्याय सिरिफ कागज मं नइ, धरातल मं दिखे बर चाही।”छत्तीसगढ़ के न्यायिक इतिहास मं अब एक नवा नाम चमकत हवय – मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा।उनकर न्यायप्रियता, निडरता अऊ जनता के हक बर समर्पण ले नवा चेतना जाग गे हवय।अब जनता कहत हवय –“जब सरकार सो जाथे, त न्यायालय जाग जाथे…अऊ जब न्यायालय बोलथे, त सत्ता के नींद हराम हो जाथे।”


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