तरुण कौशिक/ संपादक /
0 1 नवंबर के दिन हमर मन गदगद अऊ गर्व ले भर जाथे। काबर आजेच के दिन वो सपना साकार होइस, जऊन सपना ला देखे रहिन भारत रत्न, भूतपूर्व प्रधानमंत्री, राज्य निर्माता अटल बिहारी वाजपेयी जी। छत्तीसगढ़ के अलग अस्मिता, अपन संस्कृति, अपन बोली अऊ अपन गौरव के चिन्ह ला भारत के नक्शा म उकेर दे के जऊन ऐतिहासिक काम अटल जी करिन, वो दिन ला आज पूरा छत्तीसगढ़ श्रद्धा, कृतज्ञता अऊ गर्व ले याद करत हवय।साल 2000 म जब नवा राज्य बने रहिस, त अटल जी के वो घोषणा सिरिफ राजनीतिक निर्णय नइ रहिस, वो त करोड़ों छत्तीसगढ़िया मन के आत्मसम्मान अऊ पहचान के घोषणा रहिस। जऊन राज्य कतेक बछर तक मध्यप्रदेश के छाँव म अपन जगह खोजत रहिस, वो राज्य ला अटल जी अपन ममता अऊ दूरदर्शिता ले अलग पहचान देके “छत्तीसगढ़” कहे के अधिकार दिलाइन।आज 25 बछर के बाद, जब हम रजत जयंती के पायदान म खड़े हवन, त अपन यात्रा के पन्ना पलट के देखथन-गांव-गांव म सड़क बनिस, नदिया-पुल बनिन, अस्पताल अऊ स्कूल खुलिन, बिजली के उजाला अंधियार ला भगाइस। अन्नदाता किसान अब नवा बीज, मशीन अऊ बाजार ले जुड़त हवय। आदिवासी अऊ ग्रामीण इलाका म शासन के पहुंच बनिस, अऊ हमर नवा पीढ़ी अब अपन भाषा, अपन गाथा अऊ अपन गौरव ले परिचित होवत हवय।25 बछर के ये यात्रा सिरिफ विकास के आंकड़ा नइ, ये ह छत्तीसगढ़िया आत्मा के यात्रा आय। अटल जी के सपना सिरिफ नवा राज्य बनाना नइ रहिस, बल्कि वो सपना रहिस-सुराज के राज्य बनाना। सुराज मतलब जिहां शासन जनता के भरोसा बनके काम करे, जिहां नीति म पारदर्शिता रहय, जिहां किसान मुस्कुरावय, जिहां जवान ला रोजी-रोटी अऊ सम्मान मिलय, अऊ जिहां महतारी मन के आंख म सुरक्षा अऊ सुख के चमक दिखय।रजत जयंती हमर सबो ला स्मरण करवाथे कि उत्सव के संग कर्तव्य घलो जुड़थे। अब हम सबके जिम्मेदारी आय कि अटल जी के सपना म अपन योगदान देवो। आज हमर राजधानी रायपुर ले लइके बस्तर के पहाड़, सरगुजा के जंगल, अऊ मैदान के गांव तक विकास के लहर पहुंच गे हवय। साहित्य, खेल, शिक्षा, कला, उद्योग हर क्षेत्र म छत्तीसगढ़ अब अपन असली छवि गढ़त हवय। छत्तीसगढ़ महतारी के जोत अब घर-घर म जलत हवय, अऊ जय जोहार अब सिरिफ अभिवादन नइ, गौरव के घोष बन गे हवय।आज रजत जयंती के ये पावन बेला म, हम सब छत्तीसगढ़िया मन एक सुर म कहथन-जय छत्तीसगढ़ महतारी, जय अटल विचार। चलो, ये अवसर म हम सब मिलके ये प्रण लेथन -हम अटल जी के सपना के छत्तीसगढ़ ला सच्चे मायने म सुराज के धरती बनाबो। जिहां विकास अऊ संस्कृति संग चले, जिहां संवेदना अऊ समरसता बाढ़े, अऊ जिहां हर छत्तीसगढ़िया अपन माटी म गर्व महसूस करे।अटल सपना के सुराज अब फुल के रूप म खिल गे हवय,अब हमर जिम्मेदारी हवय, ये बगिया ला सहेज के रखबो।


