तरुण कौशिक/ संपादक सर्वव्यापी/
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय केंद्र, प्रयागराज में भारत सरकार के मिशन कर्मयोगी पहल के तहत शिक्षकों एवं कर्मचारियों के लिए कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा की अध्यक्षता में एक दिवसीय राष्ट्रीय कर्मयोगी कार्यशाला का आयोजन 7 नवंबर को केंद्र के सभा कक्ष में किया गया। कार्यशाला के उद्घाटन के अवसर पर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा ने कहा कि वास्तविक कर्मयोगी प्रशिक्षण हमें शक्ति नहीं दायित्व का बोध कराता है। उन्होंने कहा कि पद शक्ति नहीं, दायित्व देता है टीम के साथ चलना होता है। एक दूसरे पर भरोसा रखकर टीम भावना से कार्य करना जरूरी है। जीवन परस्पर स्वावलंबिता से चलता है, शिक्षण संस्थान में भी स्वावलंबिता, समग्रता का बोध होना चाहिए। निजता का परित्याग करना होता है। दृढ़ निश्चय करके साथ चलेंगे यह काउंसलिंग बहुत जरूरी है। प्रेमचंद कहते हैं कि कागज की डिग्री की कोई उपयोगिता नहीं है। सेवाभाव की डिग्री ही वास्तविक डिग्री है। विखण्डनवादी शक्तियों को चुनौती हमारे बीच से ही मिलनी चाहिए। कर्मयोगी में दीक्षित करने का भाव है। आप वास्तविक कर्मयोगी हैं, कर्म एक यज्ञशाला है, आहुति लेकर आना होगा। हम में आकांक्षा का पवित्रबल पैदा होना चाहिए। तनाव को दूर करने का माध्यम है, राष्ट्रीय सेवाभाव कार्यक्रम। सच्चा मनुष्य वह है जो रात में सोचे कि आज क्या गलत कह दिया। विश्वविद्यालय की ओर से राष्ट्रीय कर्मयोगी प्रशिक्षण के लिए साहित्य विद्यापीठ के अधिष्ठाता प्रो. अवधेश कुमार, के. के. त्रिपाठी एवं सहायक संपादक डा. अमित कुमार विश्वास को प्रशिक्षण प्राप्त करने हेतु राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय भेजा गया था। जो प्रशिक्षण प्राप्त कर विश्वविद्यालय के शिक्षकों एवं कर्मचारियों को प्रशिक्षण दे रहे हैं। राष्ट्रीय कर्मयोगी एक वृहद जनसेवा कार्यक्रम है जिसमें सेवाभाव और सहानुभूति से कार्य करने का प्रशिक्षण दिया जाता है। कर्मचारियों में आत्मविश्वास निर्माण करने के साथ-साथ ज्ञान और दक्षता विकसित करना, स्वयं का विस्तार करना तथा समूह के साथ सामंजस्य स्थापित करना आदि विषयों को लेकर दिए गए प्रशिक्षण से कार्य की गति और गुवणत्ता बढ़ाने में यह प्रशिक्षण सार्थक सिद्ध हो रहा है। इस अवसर पर जनसंचार विभाग के विद्यार्थियों द्वारा प्रायोगिक समाचार पत्र ‘प्रयाग समय, टी.वी. न्यूज बुलेटिन ‘प्रयाग दर्शन’ तथा भित्ति पत्रिका ‘सृजन’ के नए अंक का लोकार्पण कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा द्वारा किया गया। कुलपति ने इस सृजनात्मक कार्य के लिए जनसंचार की पूरी टीम को बधाई दी। कार्यशाला में स्वागत वक्तव प्रो. अखिलेश कुमार दुबे ने दिया तथा बीज वक्तव्य प्रो. अवधेश कुमार ने दिया। केंद्र के अकादमिक निदेशक प्रो. अखिलेश कुमार दुबे ने कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा, प्रो. अवधेश कुमार, डॉ. अमित कुमार विश्वास तथा श्री के. के. त्रिपाठी का स्वागत पुष्पगुच्छ, सूत की माला तथा अंगवस्त्र प्रदान कर किया। कार्यशाला में प्रो. अखिलेश कुमार दुबे, डॉ. सुप्रिया पाठक, डॉ. आशा मिश्रा, डॉ. अख्तर आलम, डॉ. हरप्रीत कौर, डॉ. मिथिलेश कुमार तिवारी, डॉ. यशार्थ मंजुल, डॉ. सत्यवीर, डॉ. विजया सिंह, गीता देवी एवं देवमूर्ति द्विवेदी आदि उपस्थित रहे।


