तरुण कौशिक/संपादक सर्वव्यापी/
महामहिम राष्ट्रपति से अपील, लाखों माताओं के लिए समानता और सम्मान सुनिश्चित करने का आग्रहनई दिल्ली, ४ दिसंबर २०२५। देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देने वाली महिला ठेका (संविदा) श्रमिकों को समान अधिकार और न्याय प्रदान करने हेतु एक सशक्त याचिका राष्ट्रपति सचिवालय में पंजीकृत की गई है। शिकायत संख्या PRSEC/E/2025/0067867 के माध्यम से, प्रख्यात याचिकाकर्ता प्रवेश कुमार जोशी ने माननीय राष्ट्रपति महोदया से अनुरोध किया है कि वे महिला संविदा कर्मियों के लिए सवेतन मातृत्व अवकाश को अनिवार्य रूप से लागू करने हेतु हस्तक्षेप करें।वर्तमान में, जहाँ स्थायी सरकारी कर्मचारियों को यह मूलभूत सुविधा सहजता से प्राप्त है, वहीं संविदा पर कार्यरत महिलाएँ इस मानवीय और संवैधानिक अधिकार से वंचित हैं।भेदभाव और संवैधानिक उल्लंघन है,याचिका में इस गंभीर असमानता को उजागर किया गया है। यह तर्क दिया गया है कि मातृत्व काल एक महिला के जीवन का सबसे संवेदनशील समय होता है, और ऐसे में सवेतन अवकाश का अभाव इन अल्पवेतनभोगी माताओं के लिए अत्यधिक मानसिक एवं वित्तीय संकट उत्पन्न करता है।याचिकाकर्ता श्री जोशी ने बल दिया है कि यह बहिष्कार संविधान के अनुच्छेद १४ (समानता का अधिकार) का स्पष्ट उल्लंघन है। उन्होंने कहा, “प्रत्येक माँ, चाहे उसकी रोज़गार स्थिति कैसी भी हो, समान आदर और समर्थन की अधिकारी है। जन्म देने और राष्ट्र की अगली पीढ़ी का पालन-पोषण करने में माँ की भूमिका सर्वोच्च होती है।”आर्थिक और सामाजिक औचित्य है,इस अपील का आधार केवल मानवीय करुणा नहीं, बल्कि सुदृढ़ आर्थिक औचित्य भी है। यह महिला कार्यबल देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में अप्रत्यक्ष रूप से महत्वपूर्ण योगदान देता है। याचिका में कहा गया है कि सवेतन मातृत्व अवकाश प्रदान करना मात्र एक परोपकारी कार्य नहीं होगा, बल्कि एक विवेकपूर्ण आर्थिक निर्णय भी होगा।”मातृत्व लाभ पर व्यय की गई राशि उपभोग और वस्तु एवं सेवा कर (GST) के माध्यम से पुनः अर्थव्यवस्था में लौटकर राष्ट्रीय खजाने को अप्रत्यक्ष रूप से समृद्ध करेगी।”प्रस्तावित ऐतिहासिक समाधानराष्ट्रपति महोदया के ऐतिहासिक निर्णय लेने के सिद्ध सामर्थ्य का उल्लेख करते हुए, याचिकाकर्ता ने यह कदम उठाने की प्रार्थना की है। प्रस्तावित समाधानों में संबंधित विभागों को तत्काल जाँच के निर्देश देना और निम्नलिखित बिंदुओं को लागू करना शामिल है, सभी महिला ठेका/संविदा कर्मियों हेतु सवेतन मातृत्व अवकाश का कठोरता से क्रियान्वयन। मातृत्व अवधि के दौरान उनकी नौकरी की सुरक्षा सुनिश्चित करना। उनकी शिकायतों के निवारण हेतु एक टोल-फ्री हेल्पलाइन स्थापित करना।याचिकाकर्ता ने विनम्रतापूर्वक एक नई राजपत्र अधिसूचना (New Gazette Notification) जारी करने का अनुरोध किया है, जिसमें सवेतन मातृत्व अवकाश के प्रावधान को सम्मिलित किया जाए।राष्ट्र को गौरवान्वित करने वाला निर्णय है, श्री जोशी ने पूर्ण विश्वास व्यक्त किया है कि यह निर्णय न केवल लाखों परिवारों को प्रसन्नता प्रदान करेगा, बल्कि भारत को विश्व प्रसन्नता सूचकांक (World Happiness Index) में भी उच्च स्थान पर ले जाएगा, जो सम्पूर्ण राष्ट्र के लिए गर्व का विषय होगा।वर्तमान स्थिति के अनुसार, यह शिकायत राष्ट्रपति सचिवालय द्वारा ग्रहण कर ली गई है और वर्तमान में परीक्षण (Examination) के अधीन है। इस महत्वपूर्ण पहल पर देश के लाखों संविदा कर्मी न्याय की आशा भरी दृष्टि से देख रहे हैं।


