तरुण कौशिक/ संपादक सर्वव्यापी/
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा महाराष्ट्र के आवासीय लेखक डॉ. भूषण भावे की पुस्तक गोवा के पारंपरिक खेल का लोकार्पण हाल ही में नागपुर पुस्तक महोत्सव में विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा एवं राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के अध्यक्ष मिलिंद मराठे द्वारा किया गया। पुस्तक की वर्तमान समय में आवश्यकता बताते हुए कुलपति प्रो.शर्मा ने कहा प्रत्येक व्यक्ति को अपने अच्छे स्वास्थ्य के लिए शरीर और मन का व्यायाम आवश्यक है। इस पुस्तक में मिट्टी से नाता रखने वाले ऐसे पारंपरिक खेलों की जानकारी दी है जिसे आज के भागदौड़ के जीवन में हम भूलते चले जा रहे हैं। उन्होंने आह्वान किया कि आज की पीढ़ी को पारंपरिक खेल खेलते हुए इसे स्वस्थ जीवन के लिए बचाए रखना चाहिए। पुस्तक के लेखक डॉ. भूषण भावे का कहना है कि गोवा के पारंपरिक खेलों पर प्राचीन काल के जीवन का प्रभाव दिखाई देता है। अधिकतर पारंपरिक खेल मैदान पर या मिट्टी, दलदल, कीचड़, पहाड़, तालाब और खेतों में खेले जाते थे, ऐसे खेलों से सामूहिकता और समूह भावना मजबूत होती थी, जिसमें हमारे संयुक्त परिवार की परंपरा व और मित्रता दिखाई देती थी। उन्होंने कहा कि पुस्तक में दिए गए खेल सामूहिक आनंद उठाने का एक बेहतर जरिया है। कोंकणी, मराठी, हिंदी व अंग्रेजी भाषाओं में लिखने वाले लेखक की 18 पुस्तकें प्रकाशित हैं। इस किताब में 100 से अधिक खेलों के बारे में जानकारी इकट्ठी की गई है ।यह पुस्तक गोवा के पारंपरिक खेल पर आधारित है। लेकिन इसमें बहुत खेल ऐसे है जो पूरे देश में अलग-अलग नाम से और अलग-अलग नियमों से खेले जाते हैं । उनका विवरण अलग-अलग हो, लेकिन उसके पीछे जो भाव है, वह एक ही है। एक-एक खेल के नियम, उसके खेलने का उचित समय और उचित काल, खेलने वालों की संख्या, खेलने का तरीका, खेल में जीत और हार का तरीका तथा हर एक खेल का एक प्रतीकात्मक चित्र दिया गया है। इससे, आधुनिक काल में इन खेलों की प्रतियोगिताएं आयोजित करने में आसानी होगी।कार्यक्रम का संचालन विजय पांडे ने किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलसचिव क़ादर नवाज़ ख़ान, स्नेहा भावे सहित अध्यापक, शोधार्थी एवं विद्यार्थीयों सहित पुस्तक प्रेमी बड़ी संख्या में उपस्थित थे।


