राज्य में न्यायिक सुधार विषय पर हिदायतुल्लाह राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय में विशेषज्ञों की अहम बैठक। - Sarvavyapi राज्य में न्यायिक सुधार विषय पर हिदायतुल्लाह राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय में विशेषज्ञों की अहम बैठक। - Sarvavyapi

राज्य में न्यायिक सुधार विषय पर हिदायतुल्लाह राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय में विशेषज्ञों की अहम बैठक।

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विकास नंद /सर्वव्यापी/

राष्ट्रीय स्तर पर कानूनी मार्गदर्शन प्रदान करने वाली संस्था सेंटर फॉर सोशल जस्टिस के माध्यम से छत्तीसगढ़ राज्य के हिदायतुल्लाह राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के वाईस चांसलर, रजिस्टार, प्रोफ़ेसर तथा सेंटर फॉर सोशल जस्टिस के मैनेजमेंट समिति के पदाधिकारी, राष्ट्र प्रमुख तथा उपरोक्त विषय के विषय विशेषज्ञ राज्य के सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ एक महत्वपूर्ण परामर्श बैठक आयोजित की गई। बैठक का उद्देश्य न्याय की सरल, समान तथा समयबद्ध पहुँच सुनिश्चित करने हेतु विभिन्न कानूनों और प्रक्रियाओं पर सुधारात्मक सुझाव प्राप्त करना था।परामर्श में प्रमुख रूप से बालकों के विरुद्ध लैंगिक हिंसा के मामलों के संबंध में विधि-सम्मत त्वरित क्रियान्वयन, अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के प्रावधानों के अंतर्गत पारदर्शी एवं समयबद्ध निवारण प्रक्रिया, तथा वर्तमान न्यायिक व्यवस्था में पुलिस प्रशासन की संवेदनशीलता एवं जागरूकता को बढ़ाने की आवश्यकता पर चर्चा की गई। साथ ही महिला उत्तरजीवी क्षतिपूर्ति की राशि, उसकी समय-सीमा तथा राहत तंत्र को अधिक प्रभावी बनाने पर भी विशेष बल दिया गया।इस अवसर पर महासमुन्द जिले के सामाजिक कार्यकर्ता एवं समुदाय शोधकर्ता डॉ. सुरेश शुक्ला के सुझावों को प्रमुखता से शामिल किया गया। डॉ. शुक्ला ने कहा कि भारतीय न्यायिक व्यवस्था में निर्धारित समय पर न्याय न मिलना जनता में न्यायिक तंत्र के प्रति अविश्वास को बढ़ाता है। उनके अनुसार, “न्याय में विलंब भी एक प्रकार का अन्याय है,” इसलिए प्रत्येक प्रकरण हेतु स्पष्ट और अनिवार्य समय-सीमा का निर्धारण अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि बाल पीड़ितों से जुड़े मामलों में त्वरित जांच, साक्ष्य संरक्षण और पीड़ित-हितैषी प्रक्रिया को अनिवार्य रूप से लागू किया जाना चाहिए।परामर्श बैठक में छत्तीसगढ़ राज्य के राज्य स्तरीय विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव, हिदायतुल्ला महाविद्यालय के वाईस चांसलर, तथा देशभर से सामाजिक क्षेत्र में कार्यरत प्रतिष्ठित संस्थाओं के विषय विशेषज्ञ उपस्थित थे। सभी विशेषज्ञों ने मिलकर न्याय प्रणाली को अधिक संवेदनशील, समयबद्ध और जवाबदेह बनाने हेतु आवश्यक सिफारिशें प्रस्तुत कीं।यह परामर्श राज्य में न्याय की पहुँच को मजबूत करने और सामाजिक न्याय व्यवस्था में विश्वसनीयता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध हुई।


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