तरुण कौशिक/संपादक सर्वव्यापी/
छत्तीसगढ़ के राज्य गठन के बाद हुए प्रथम विधानसभा चुनाव ने जिस नेता को राज्य की बागडोर सौंपी, वह आगे चलकर छत्तीसगढ़ की राजनीति का सबसे स्थायी और प्रभावी चेहरा बन गया। दिन था 7 दिसंबर 2003, जब डॉ. रमन सिंह ने प्रदेश के प्रथम निर्वाचित मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेकर एक ऐसे कार्यकाल की शुरुआत की, जिसने न सिर्फ छत्तीसगढ़ की दिशा बदली बल्कि पूरे देश की राजनीति में एक मिसाल कायम कर दी। मुख्यमंत्री के रूप में उनका यह सफर कोई साधारण उपलब्धि नहीं था, बल्कि लगातार तीन बार मिले जनादेश के रूप में जनता के अटूट विश्वास का प्रमाण था। 2003 से 2018 तक लगातार 15 वर्ष 10 दिनों तक सत्ता में बने रहना ऐसा इतिहास है जिसे चुनौती देना आज भी किसी भी राजनीतिक दल या नेता के लिए आसान नहीं है। छत्तीसगढ़ जैसे नवगठित राज्य में इतनी लंबी अवधि तक शासन करना इस बात का संकेत है कि जनता ने उन्हें केवल नेता नहीं, बल्कि भरोसे का प्रतीक माना।डॉ. रमन सिंह के लंबे कार्यकाल में छत्तीसगढ़ ने अनेक क्षेत्रों में अभूतपूर्व प्रगति की। पीडीएस सिस्टम का मॉडल, जिसे बाद में पूरे देश ने अपनाया, गरीब परिवारों को सस्ते दाम पर चावल उपलब्ध कराने की ऐतिहासिक पहल, बिजली–सड़क–पानी की उपलब्धता में व्यापक सुधार, किसानों के हित में बढ़ा समर्थन मूल्य और ग्रामीण विकास की योजनाओं ने आम जनता के जीवन को गहराई से प्रभावित किया। उनका नाम राज्य में जनधन योजनाओं, स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार, वनांचलों में विकास और आदिवासी क्षेत्रों में सरकारी योजनाओं की सीधी पहुंच सुनिश्चित करने के लिए हमेशा स्मरण किया जाता रहेगा।नक्सल प्रभावित बस्तर क्षेत्र में विकास पहुंचाना हमेशा एक चुनौती रहा है, लेकिन डॉ. सिंह के नेतृत्व में सड़क, शिक्षा, पोषण और सुरक्षा के मॉडल पर नए सिरे से काम किया गया। उनकी विकासवादी नीति ने शासन को बस्तर के दूरस्थ इलाकों तक पहुंचाया और वहां के लोगों में विश्वास की नई ऊर्जा भरी। भारत की राजनीति में किसी मुख्यमंत्री का इतना लंबा, लगातार और स्थिर कार्यकाल बहुत कम देखने को मिलता है, लेकिन डॉ. रमन सिंह ने इसे संभव कर दिखाया और छत्तीसगढ़ को राजनीतिक स्थिरता का नया अध्याय दिया।आज डॉ. रमन सिंह प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष के रूप में नई जिम्मेदारी निभा रहे हैं। मुख्यमंत्री से लेकर विधानसभा अध्यक्ष तक की उनकी यात्रा बताती है कि वे केवल एक विशिष्ट नेता नहीं बल्कि छत्तीसगढ़ की राजनीति के मार्गदर्शक बन चुके हैं। 7 दिसंबर 2003 की उस ऐतिहासिक घड़ी को याद करते समय यह स्पष्ट होता है कि उस दिन ने न केवल एक मुख्यमंत्री को जन्म दिया, बल्कि छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक स्वर्णिम युग की शुरुआत भी की। डॉ. रमन सिंह का 15 वर्ष 10 दिनों का कार्यकाल प्रदेश की जनता के दिलों में स्थिरता, विश्वास और विकास के दीर्घकालिक अध्याय के रूप में दर्ज हो चुका है।यह दिन इसलिए भी यादगार है क्योंकि इसने साबित कर दिया कि राजनीति में समय नहीं, बल्कि जनता का विश्वास ही सबसे बड़ी ताकत होती है। 7 दिसंबर—छत्तीसगढ़ के इतिहास का वह पन्ना, जो हमेशा डॉ. रमन सिंह के नाम से चमकता रहेगा।


