वन में बदले मायने: भ्रष्टाचार पर प्रहार और संरक्षण को संकल्प—डीएफओ गीष्मी के ईमानदार कदमों से क्यों बेचैन हैं दलाल? - Sarvavyapi वन में बदले मायने: भ्रष्टाचार पर प्रहार और संरक्षण को संकल्प—डीएफओ गीष्मी के ईमानदार कदमों से क्यों बेचैन हैं दलाल? - Sarvavyapi

वन में बदले मायने: भ्रष्टाचार पर प्रहार और संरक्षण को संकल्प—डीएफओ गीष्मी के ईमानदार कदमों से क्यों बेचैन हैं दलाल?

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तरुण कौशिक/संपादक सर्वव्यापी/

बिलासपुर संभाग से लगे जिला गौरेला–पेंड्रा–मरवाही वनमंडल में इन दिनों एक नया दौर देखने को मिल रहा है। वन मंडलाधिकारी गीष्मी चाँद ने पदभार सँभालने के बाद जिस सख्ती से विभागीय भ्रष्टाचार और अनियमितताओं पर लगाम कसी है, उससे पूरे वन मंडल में अनुशासन और पारदर्शिता की नई उम्मीद जगी है।वन विभाग में वर्षों से जमे उन तथाकथित ‘दलाल तत्वों’ पर गीष्मी चाँद ने न केवल सख्त नकेल कसी है, बल्कि व्यवस्था को साफ-सुथरा बनाने की दिशा में साहसिक पहल भी की है। यही कारण है कि आर्थिक लाभ में कटौती होने से प्रभावित कुछ लोग अब उनके खिलाफ अनर्गल शिकायतों का सहारा लेकर बेवजह का दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं।वहीं, दूसरी ओर गीष्मी चाँद ने वन्यजीव संरक्षण, जंगल सुरक्षा और पर्यावरण संतुलन को लेकर उल्लेखनीय कार्य किए हैं। वन सीमा क्षेत्रों में नियमित गश्त, अवैध कटाई पर अंकुश, घायल वन्यजीवों का उपचार, और स्थानीय समुदायों को संरक्षण की दिशा में जोड़ने जैसे कदमों ने उनके कार्यों को और भी प्रभावी बनाया है।स्थानीय ग्रामीणों और ईमानदार वन कर्मियों का कहना है कि विभाग में वर्षों बाद किसी अधिकारी ने अखंड निष्ठा और पारदर्शिता के साथ काम शुरू किया है। यही वजह है कि अवैध गतिविधियों से लाभ उठाने वाले लोगों को यह रास नहीं आ रहा।समाज और विभाग दोनों ही अपेक्षा कर रहे हैं कि गीष्मी चाँद जैसे अधिकारी बिना किसी दबाव के अपनी कार्यशैली जारी रखें, क्योंकि ऐसे ही अधिकारी जंगल और वन्यजीवों के भविष्य को बेहतर दिशा दे सकते हैं।


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